'स्टेटहुड मांगते ही क्यों होती हैं घटनाएं', फारूक के बयान से जम्मू-कश्मीर में सियासी हलचल
जम्मू-कश्मीर : कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने इस घटना को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठाती है, उसी समय इस तरह की घटनाएं क्यों सामने आती हैं। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है।
कुलगाम में हुए इस हमले में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया गया था। शनिवार को इस घटना को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हमलावर कौन थे और किस मकसद से यह हमला किया गया। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सामने लाने की अपील की।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग लगातार उठाई जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब भी यह मुद्दा सामने आता है, तभी ऐसी घटनाएं क्यों होने लगती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं के पीछे की सच्चाई सामने आनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर इसके पीछे कौन लोग हैं।
बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पिछले कुछ समय से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सक्रिय है। पार्टी की ओर से इस मुद्दे को लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन किया जा चुका है। वहीं, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) भी पांच अगस्त को पूर्ण राज्य और अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं का कहना है कि कुछ ताकतें नहीं चाहतीं कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और इसी वजह से माहौल खराब करने की कोशिश की जाती है। पार्टी के नेताओं ने कुलगाम हमले की विस्तृत जांच की मांग की है।
हालांकि, फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने अब्दुल्ला के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे बयान आतंकवादियों का मनोबल बढ़ाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ण राज्य का दर्जा देना संसद का विषय है और इसका आतंकवादी घटनाओं से कोई संबंध नहीं है।
भाजपा ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता कई बार आतंकवाद से जुड़े मामलों पर सवाल खड़े करते हैं, जिससे सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर असर पड़ता है। पार्टी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सभी राजनीतिक दलों को एकजुट रहना चाहिए।
गौरतलब है कि कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। जानकारी के अनुसार, हमले में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा बलों ने निगरानी बढ़ा दी है।
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय से प्रवासी मजदूरों और गैर-स्थानीय नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे घाटी में काम करने वाले मजदूरों और अन्य लोगों में चिंता का माहौल बना है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे हमलों को रोकने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं।
कुलगाम घटना के बाद एक बार फिर सुरक्षा, आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां विपक्षी दल सरकार से जवाब मांग रहे हैं, वहीं भाजपा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कह रही है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हमले के पीछे शामिल आतंकियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच में जुटी हुई हैं।