रांची। झारखंड की राजधानी रांची में आने वाले वर्षों में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। बढ़ते यातायात दबाव और लगातार लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार ने राजधानी में 10 नए फ्लाईओवर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद पथ निर्माण विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेज कर दिया है।
प्रस्तावित फ्लाईओवरों का निर्माण शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में किया जाएगा। इनमें कांटाटोली-नेवरी, बरियातू रोड, कांके रोड, हरमू नदी किनारा, मेकन-बिरसा चौक और डीपीएस रूट सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में ट्रैफिक का दबाव कम करना और लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना है।
पथ निर्माण विभाग के अनुसार, नौ फ्लाईओवरों के निर्माण पर करीब 3 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, जमीन अधिग्रहण, बिजली-पानी की लाइनों को स्थानांतरित करने और अन्य जरूरी कार्यों के कारण कुल लागत में बढ़ोतरी हो सकती है। कांटाटोली से नेवरी तक बनने वाले फ्लाईओवर की योजना को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी।
डीपीआर तैयार, जल्द शुरू होगा काम
रांची में प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है। संबंधित कंपनियों की मदद से तैयार की गई रिपोर्ट के बाद अब परियोजनाओं को तकनीकी मंजूरी मिलने का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद इन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद राज्य योजना प्राधिकृत समिति और मंत्रिपरिषद से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दो वर्षों में कई फ्लाईओवर परियोजनाएं जमीन पर दिखाई देने लगें। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजधानी में यातायात व्यवस्था को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
कांके रोड पर बनेगा सबसे लंबा फ्लाईओवर
प्रस्तावित योजनाओं में कांके रोड का फ्लाईओवर सबसे बड़ा होगा। यह एपीएन शाहदेव चौक से रिनपास होते हुए रिंग रोड तक बनाया जाएगा। इसकी लंबाई करीब 8.5 किलोमीटर होगी। इस परियोजना पर लगभग 850 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
वहीं, बरियातू रोड पर करमटोली स्थित लोकायुक्त भवन से रिम्स होते हुए सेवन डे हॉस्पिटल तक करीब 5.2 किलोमीटर लंबा फोरलेन फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 625 करोड़ रुपये है और इसे तकनीकी मंजूरी भी मिल चुकी है।
इसके अलावा हिनू ओवरब्रिज से धुर्वा के जगन्नाथपुर मंदिर तक स्वर्णरेखा नदी के किनारे करीब 5 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर प्रस्तावित है। इस पर करीब 470 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। हरमू मुक्तिधाम से रेडिसन ब्लू तक हरमू नदी के दोनों किनारों पर 2.2 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की योजना है, जिसकी लागत करीब 250 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
कांटाटोली-नेवरी फ्लाईओवर होगा अहम परियोजना
रांची की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में कांटाटोली से नेवरी तक बनने वाला फ्लाईओवर शामिल है। इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। यह कोकर चौक और बूटी मोड़ होते हुए नेवरी तक जाएगा। इस परियोजना से शहर के दक्षिणी हिस्से में यातायात व्यवस्था को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
17 फ्लाईओवर वाला शहर बनेगा रांची
रांची में पहले से ही कई बड़े फ्लाईओवर तैयार हो चुके हैं। इनमें सिरमटोली-मेकन चौक, कांटाटोली-बहुबाजार और रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल हैं। इसके अलावा बहुबाजार से सिरमटोली तक कनेक्टिंग फ्लाईओवर का निर्माण जारी है, जिसे जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
करमटोली चौक से चिरौंदी, अरगोड़ा चौक और हरमू चौक से रातू रोड चौक तक बनने वाले फ्लाईओवर के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। अगर प्रस्तावित 10 नए फ्लाईओवर पूरे हो जाते हैं तो रांची में कुल 17 फ्लाईओवर हो जाएंगे।
पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने बताया कि राजधानी की सड़क व्यवस्था को आधुनिक बनाने का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर रांची समेत पूरे राज्य में सड़क संपर्क बेहतर बनाने के लिए फ्लाईओवर और फोरलेन सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी, बल्कि लोगों का सफर भी आसान होगा। आने वाले वर्षों में रांची एक आधुनिक और बेहतर कनेक्टिविटी वाले शहर के रूप में विकसित हो सकती है।