किसानों के लिए खुशखबरी 1 रुपये में कराएं फसल बीमा जानें कितनी मिलेगी रकम
चतरा के किसानों के लिए बड़ी राहत 1 रुपये में होगा फसल बीमा
चतरा: झारखंड के चतरा जिले के किसानों के लिए फसल सुरक्षा से जुड़ी बड़ी खबर है। बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ 2026-27 के तहत किसान महज 1 रुपये के सांकेतिक प्रीमियम पर अधिसूचित फसलों का बीमा करा सकते हैं। योजना के तहत किसानों को प्राकृतिक आपदा और प्रतिकूल मौसम के कारण फसल खराब होने की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देने का प्रावधान है।
जिले में किसानों को योजना से जोड़ने के लिए प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान भी शुरू किया गया है। इसके तहत प्रचार रथ को गांवों, पंचायतों और प्रखंडों में भेजा जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्र किसान समय सीमा के भीतर फसल बीमा करा सकें।
सिर्फ 1 रुपये देना होगा प्रीमियम
खरीफ 2026-27 के लिए चतरा में अधिसूचित फसलों का बीमा कराने वाले किसानों को केवल 1 रुपये का सांकेतिक प्रीमियम देना होगा। शेष प्रीमियम राशि राज्य सरकार की ओर से वहन की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य किसानों पर बीमा प्रीमियम का आर्थिक बोझ कम करना और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान की स्थिति में उन्हें वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
धान के लिए इतनी है बीमित राशि
चतरा जिले में खरीफ सीजन के लिए अधिसूचित फसलों की बीमित राशि भी तय की गई है। अगहनी धान के लिए प्रति हेक्टेयर 63,558 रुपये की बीमित राशि निर्धारित की गई है। वहीं भदई मकई के लिए प्रति हेक्टेयर 48,513 रुपये की बीमित राशि तय है। ध्यान रहे कि बीमित राशि का मतलब यह नहीं है कि हर नुकसान की स्थिति में किसान को पूरी राशि मिल जाएगी। दावा राशि योजना के प्रावधानों और निर्धारित फसल नुकसान के आकलन के आधार पर तय होगी।
किन परिस्थितियों में मिल सकता है दावा?
योजना के तहत अलग-अलग प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है। अगर कम बारिश या प्रतिकूल मौसम के कारण किसान फसल की बुवाई नहीं कर पाता है या बुवाई विफल हो जाती है, तो योजना के नियमों के अनुसार दावा भुगतान का प्रावधान है। इसके अलावा खड़ी फसल को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान तथा निर्धारित प्रक्रिया के तहत फसल कटाई से संबंधित नुकसान का भी आकलन किया जा सकता है।
कटाई के बाद भी मिलेगा सुरक्षा कवच
फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को भी कुछ परिस्थितियों में बीमा सुरक्षा मिलती है। चक्रवात, बेमौसम या बरसाती बारिश और ओलावृष्टि से कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को नुकसान होने पर योजना के प्रावधानों के अनुसार दावा किया जा सकता है। यह प्रावधान उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी फसल कटने के बाद अचानक मौसम खराब होने से नुकसान हो जाता है।
फसल की उपज कम होने पर भी दावा
अगर फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त उपज निर्धारित सीमा उपज से कम आती है तो योजना के नियमों के अनुसार बीमा दावा भुगतान का प्रावधान है। हालांकि दावा राशि और पात्रता का निर्धारण निर्धारित प्रक्रिया, नुकसान के आकलन और योजना के नियमों के अनुसार ही किया जाएगा।
ऋणी और गैर-ऋणी दोनों किसान करा सकते हैं बीमा
इस योजना का लाभ ऋणी और गैर-ऋणी दोनों किसान उठा सकते हैं। ऋणी किसानों का बीमा संबंधित ऋणदाता संस्था के माध्यम से नियमानुसार किया जाएगा। वहीं गैर-ऋणी किसान बैंक शाखा, सहकारी समिति, प्रज्ञा केंद्र, फसल बीमा ऐप या संबंधित पोर्टल के माध्यम से अपना बीमा करा सकते हैं।
इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत
गैर-ऋणी किसानों को फसल बीमा कराने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। इनमें प्रमुख रूप से:
नवीनतम आधार कार्ड
बैंक पासबुक
भूमि से संबंधित दस्तावेज
फसल की बुवाई से संबंधित आवश्यक दस्तावेज
किसानों को सलाह दी गई है कि बीमा कराने से पहले अपने दस्तावेजों की जानकारी और पात्रता की जांच कर लें।
31 अगस्त तक चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
चतरा प्रशासन ने किसानों को योजना की जानकारी देने के लिए विशेष प्रचार अभियान शुरू किया है। 10 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक प्रचार रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों और ग्रामीण इलाकों में जाएगा। इस दौरान किसानों को बीमा की प्रक्रिया, पात्रता, जरूरी दस्तावेज और योजना के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य अधिक से अधिक पात्र किसानों को योजना से जोड़ना है।
प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान पर मदद
खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहने के कारण सूखा, अत्यधिक बारिश, ओलावृष्टि, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक घटनाओं से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में फसल बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। केंद्र की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से संचालित होती है।
किसान समय पर करा लें बीमा
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित अवधि के भीतर फसल बीमा करा लें। सिर्फ योजना की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है; पात्र किसानों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना भी जरूरी है। किसानों को किसी अनधिकृत व्यक्ति या बिचौलिए को पैसे देने से बचना चाहिए और बीमा के लिए बैंक, सहकारी समिति, प्रज्ञा केंद्र या अधिकृत ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल करना चाहिए।
चतरा में क्यों महत्वपूर्ण है योजना?
चतरा के बड़ी संख्या में किसान खरीफ सीजन में धान और मकई जैसी फसलों पर निर्भर रहते हैं। मौसम में अचानक बदलाव या प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होने पर किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सिर्फ 1 रुपये के सांकेतिक प्रीमियम पर बीमा का विकल्प किसानों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना फसल नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।