रांची : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में जलजमाव की समस्या को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कड़ा रुख अपनाया है। अस्पताल परिसर में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति सामने आने पर मंत्री ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया और लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार को डी-रजिस्टर (पंजीकरण रद्द) करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।

स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि मरीजों की सुविधा और अस्पताल की व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि निर्माण कार्य या रखरखाव में लापरवाही पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जलजमाव से मरीजों और तीमारदारों को परेशानी
बारिश के बाद रिम्स परिसर में कई स्थानों पर जलभराव हो गया, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल के कुछ हिस्सों में पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिए सख्त निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलजमाव के कारणों की तत्काल जांच कराई जाए और यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने दोषी ठेकेदार को डी-रजिस्टर करने की प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए हैं।
मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
मंत्री ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट में जलजमाव के कारण, जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों की भूमिका, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रस्तावित उपायों की जानकारी शामिल करने को कहा गया है।
अस्पताल की व्यवस्था सुधारने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि रिम्स राज्य का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, इसलिए यहां बुनियादी सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। विभाग ने अस्पताल प्रशासन को जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने और मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
जवाबदेही तय करने की तैयारी
सरकार का कहना है कि यदि जांच में निर्माण एजेंसी, ठेकेदार या संबंधित अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की नियमित निगरानी और समय-समय पर रखरखाव जरूरी है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

Tags: