रांची। झारखंड कांग्रेस ने पार्टी के मंत्रियों को सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने राज्य में कांग्रेस कोटे के सभी मंत्रियों को सलाह दी है कि वे किसी भी मुद्दे पर पार्टी के रुख से अलग बयान न दें और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से पहले पार्टी प्लेटफॉर्म पर चर्चा जरूर करें। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के लिए सभी मंत्रियों को एकजुट होकर काम करना होगा।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया एवं कम्युनिकेशन विभाग के सदस्यों के साथ बैठक के बाद कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि कई बार एक ही मुद्दे पर पार्टी के अलग-अलग नेताओं और मंत्रियों के बयान अलग-अलग सामने आते हैं, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनती है। इसे दूर करने के लिए मंत्रियों का एक फोरम बनाया जाएगा, जिसमें सभी मंत्री नियमित रूप से बैठक कर जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे और उसके बाद पार्टी की एक राय जनता के सामने रखी जाएगी।
के. राजू ने बताया कि अब हर 15 दिन में मंत्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में राज्य के प्रमुख जनमुद्दों, सरकार की योजनाओं और जनता से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इसके बाद ही किसी मुद्दे पर पार्टी का आधिकारिक पक्ष सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार में शामिल सभी नेताओं को संगठन की नीति और विचारधारा के अनुरूप काम करना होगा।
उन्होंने मंत्रियों को यह भी निर्देश दिया कि वे जल्द ही अपने-अपने जिलों में जाकर आम जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संवाद करें। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि पहले मंत्रियों को जिलों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनने और कार्यकर्ताओं से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन यह अभियान अपेक्षित रूप से जमीन पर नहीं उतर पाया। अब अगले दो महीने के भीतर सभी मंत्री अलग-अलग जिलों का दौरा करेंगे और लोगों की समस्याओं को समझने का प्रयास करेंगे।
कांग्रेस ने आने वाले समय में जनमुद्दों को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चलाने की भी तैयारी की है। कैंपेन कमेटी की बैठक में प्रमंडलवार वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रत्येक प्रमंडल में दो कमेटियां बनाई जाएंगी, जो अगले छह महीने तक जनता से जुड़े मुद्दों पर अभियान चलाएंगी। इसके तहत सेमिनार, कार्यशाला और जनसभाओं के माध्यम से आम लोगों से संवाद किया जाएगा और उनकी समस्याओं को पार्टी के मंच तक पहुंचाया जाएगा।
बैठक में अनुसूचित जाति आयोग के गठन का मुद्दा भी उठा। कांग्रेस प्रभारी ने कहा कि दलितों के संवैधानिक और मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए हर राज्य में अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया गया है। झारखंड में भी आयोग के गठन को लेकर मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है और पार्टी इस दिशा में प्रयास जारी रखेगी।
वहीं दूसरी ओर झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी भी अब खत्म हो गई है। पिछले कुछ समय से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी नाराजगी सामने आई थी। मंगलवार को सरकार और पुलिस विभाग की ओर से उनकी मांग के अनुसार सुरक्षा काफिले में वाहनों की संख्या बढ़ा दी गई। इसके बाद वित्त मंत्री ने सामान्य रूप से कार्यालय पहुंचकर कामकाज निपटाया।
बताया जा रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे मुद्दे के समाधान के बाद मंत्री और विभाग के बीच स्थिति सामान्य हो गई है। कांग्रेस नेतृत्व अब संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दे रहा है, ताकि आगामी राजनीतिक अभियानों में पार्टी एकजुट होकर जनता के बीच अपनी बात रख सके।