IT(ISM) धनबाद की बड़ी उपलब्धि, अपशिष्ट जल से तांबा निकालने वाली तकनीक को मिला पेटेंट

Update: 2026-08-01 11:46 GMT

झारखंड: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस) धनबाद यानी IIT(ISM) ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग की टीम द्वारा विकसित अपशिष्ट जल से तांबा (कॉपर) निकालने की अभिनव तकनीक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से मंजूरी मिल गई है। यह तकनीक औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के साथ-साथ उसमें मौजूद मूल्यवान धातुओं की पुनर्प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

IIT(ISM) धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर विपिन कुमार और उनके पीएचडी शोधार्थियों निशांत पांडेय व अंकुर सिंह की टीम ने इस तकनीक को विकसित किया है। इस आविष्कार का नाम "अपशिष्ट जल से कैथोडिक विधि द्वारा तांबा प्राप्त करने के लिए एक इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्टर" है। इस तकनीक के लिए 30 जुलाई 2026 को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने आधिकारिक रूप से पेटेंट प्रदान किया।

इस नई तकनीक की खासियत यह है कि इसके माध्यम से औद्योगिक अपशिष्ट जल में मौजूद तांबे को इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्टर की मदद से अलग किया जा सकता है। इससे एक तरफ जहां प्रदूषित जल का बेहतर तरीके से उपचार संभव होगा, वहीं दूसरी ओर पानी में मौजूद मूल्यवान धातु को दोबारा उपयोग में लाया जा सकेगा। इससे उद्योगों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

खनन और धातु उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल में कई प्रकार की भारी धातुएं मौजूद होती हैं, जो पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। खासकर खनन प्रभावित क्षेत्रों में जल प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। IIT(ISM) की यह तकनीक ऐसे क्षेत्रों में अपशिष्ट जल प्रबंधन और धातु पुनर्प्राप्ति के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक जैव-इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया के जरिए संसाधनों की रिकवरी को बढ़ावा देती है। वर्तमान समय में जब दुनिया सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दे रही है, तब ऐसी तकनीकें प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

इस उपलब्धि पर प्रोफेसर विपिन कुमार ने कहा कि यह पेटेंट कई वर्षों की मेहनत, लगातार शोध और वैज्ञानिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पेटेंट प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण रही, जिसमें तकनीक की नवीनता और उपयोगिता को कई स्तरों पर साबित करना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह तकनीक खासकर खनन प्रभावित क्षेत्रों में अपशिष्ट जल प्रबंधन और मूल्यवान संसाधनों की रिकवरी के लिए उपयोगी साबित होगी।

IIT(ISM) धनबाद के निदेशक प्रोफेसर सुकुमार मिश्रा ने भी इस उपलब्धि पर शोध टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पेटेंट संस्थान में हो रहे गुणवत्तापूर्ण शोध और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए इस तरह की तकनीकों की आज बहुत आवश्यकता है।

प्रोफेसर विपिन कुमार पर्यावरण माइक्रोबायोलॉजी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, वेस्ट से रिसोर्स रिकवरी, माइक्रोबियल इलेक्ट्रोकेमिकल सिस्टम, रेस्टोरेशन इकोलॉजी और जैविक अपशिष्ट जल उपचार जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हैं। उनके नेतृत्व में विकसित यह तकनीक IIT(ISM) धनबाद की शोध यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

यह पेटेंट न केवल संस्थान की वैज्ञानिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारतीय शोध संस्थान पर्यावरण और उद्योगों से जुड़ी बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी तकनीक विकसित कर रहे हैं। अपशिष्ट जल से तांबा निकालने वाली यह तकनीक आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण और संसाधन पुनर्चक्रण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

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