रांची। झारखंड पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता मिलने का दावा किया है। झारखंड पुलिस प्रमुख तडाशा मिश्रा ने शनिवार को बताया कि इस साल जनवरी से अब तक राज्य में 103 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 46 नक्सलियों ने पुलिस और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण किया है। वहीं, सुरक्षा बलों के साथ हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में 22 नक्सली मारे गए हैं।

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस प्रमुख ने कहा कि झारखंड पुलिस ने नक्सलवाद की चुनौती को काफी हद तक कमजोर करने में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, बेहतर रणनीति और खुफिया तंत्र की मजबूती के कारण राज्य में नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा रहा है।

तडाशा मिश्रा ने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस और सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य न केवल नक्सली गतिविधियों को रोकना है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के बीच विश्वास कायम करना भी है। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

पुलिस प्रमुख ने बताया कि अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है। अब तक कुल 98 हथियार, 7,470 कारतूस और करीब 11 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री जब्त की गई है। उन्होंने कहा कि यह बरामदगी सुरक्षा बलों की सतर्कता और प्रभावी कार्रवाई को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि नक्सली संगठनों की कमर तोड़ने के लिए पुलिस लगातार उनके नेटवर्क को खत्म करने में जुटी हुई है। इसके लिए राज्य पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पुलिस प्रमुख ने जवानों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में तैनात पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। उनके साहस और समर्पण के कारण ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हालात बेहतर हुए हैं।

उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस की प्राथमिकता राज्य में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और जनता के साथ बेहतर संबंध बनाना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।

पुलिस प्रमुख ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति और पुलिस के प्रयासों के कारण कई नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्होंने अन्य नक्सलियों से भी हथियार छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में शामिल होने की अपील की।

झारखंड लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है। राज्य के कई जिले पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के रूप में चिन्हित रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रशासनिक प्रयासों के चलते नक्सली प्रभाव में कमी आने का दावा किया जा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों और जवानों ने देश की सुरक्षा और नागरिकों की सेवा का संकल्प दोहराया। पुलिस प्रमुख ने कहा कि राज्य को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस आने वाले समय में आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया तंत्र और मजबूत रणनीति के साथ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों से राज्य को पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाया जा सकेगा।

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