महिला किसानों की मेहनत से आम को मिली ग्लोबल उड़ान

Update: 2026-07-21 10:08 GMT

झारखंड: गुमला जिले में कभी सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित रहने वाला आम अब देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहा है। जिले की प्रसिद्ध आम्रपाली किस्म के आम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस्तक देकर नई उपलब्धि हासिल की है। गुमला की महिला किसानों की मेहनत और संगठित प्रयासों के कारण यहां का आम अब इटली जैसे विदेशी बाजारों के साथ-साथ रिलायंस रिटेल और लुलु जैसे बड़े संगठित बाजारों तक पहुंच गया है।

राष्ट्रीय आम दिवस के मौके पर गुमला की यह सफलता सिर्फ कृषि क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बदलाव की कहानी भी पेश करती है। जिले में आम की खेती अब हजारों परिवारों के लिए स्थायी आय का जरिया बन रही है।

गुमला जिले में करीब 21 हजार एकड़ क्षेत्र में आम के बागान फैले हुए हैं। इनमें लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र में फल उत्पादन शुरू हो चुका है। जिले को आम के उत्पादन के लिए एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत भी चुना गया है। पालकोट, घाघरा सहित कई क्षेत्रों की मिट्टी और जलवायु आम्रपाली समेत अन्य प्रजातियों की खेती के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है।

इन क्षेत्रों में पहले जो जमीन कम उपयोगी या बंजर मानी जाती थी, आज वही जमीन हरे-भरे आम के बागानों में बदल चुकी है। इससे ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आमदनी का नया साधन मिला है।

इस बदलाव में महिला किसानों की भूमिका सबसे अहम रही है। पालकोट क्षेत्र की कृषि बागवानी स्वावलंबन सहकारी समिति लिमिटेड ने महिलाओं को खेती से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया से जोड़ा है। समिति किसानों को बेहतर बाग प्रबंधन, गुणवत्ता सुधार, आम की पैकिंग, संग्रहण और बिक्री की आधुनिक जानकारी उपलब्ध करा रही है।

जिला प्रशासन और स्वयंसेवी संस्था प्रदान के सहयोग से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे किसान केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब बाजार की जरूरतों को समझते हुए बेहतर कीमत हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं।

वर्ष 2026 का आम सीजन गुमला के लिए बेहद खास रहा। सहकारी समिति के माध्यम से 300 मीट्रिक टन से अधिक आम का विपणन किया गया। इसमें करीब 2 मीट्रिक टन आम इटली भेजा गया, जबकि 6 मीट्रिक टन आम रिलायंस रिटेल को सप्लाई किया गया। आदिवासी बहुल जिले की महिला किसानों के उत्पाद का विदेश तक पहुंचना ग्रामीण क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसान अब आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पेपर बैगिंग तकनीक के जरिए आम को पेड़ पर ही विशेष कागजी बैग से ढक दिया जाता है, जिससे फल मक्खी और अन्य कीटों से सुरक्षा मिलती है। इससे आम की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों में सुधार हुआ है।

इसके अलावा मैंगो सर्विस मॉडल के तहत किसानों को बाग प्रबंधन, कृषि सेवाओं, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन की पूरी प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र गुमला और अन्य तकनीकी संस्थानों द्वारा किसानों को फेरोमोन ट्रैप जैसी वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है, जिससे कीट नियंत्रण बेहतर हुआ है।

महिला किसानों का कहना है कि पहले आम बेचने के लिए उन्हें स्थानीय बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां उचित कीमत नहीं मिलती थी। सहकारी समिति से जुड़ने के बाद उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंच मिली और आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई।

पालकोट की किसान रोशनी बा ने बताया कि इस बार चार टन आम बेचकर करीब 60 हजार रुपये की आय हुई। वहीं सरिता किड़ो ने कहा कि संगठित बाजार मिलने से पहली बार उनके उत्पाद को बेहतर कीमत मिली और करीब 70 हजार रुपये की आमदनी हुई।

गुमला प्रशासन भी आम आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में गुमला के आम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाए।

उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने कहा कि इस वर्ष सीमित मात्रा में आम का निर्यात किया गया, लेकिन इसका अनुभव काफी सकारात्मक रहा। अगले सीजन में समय से तैयारी शुरू कर अधिक मात्रा में आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना बनाई जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, ब्रांडिंग और निर्यात व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तो गुमला देश के प्रमुख आम उत्पादक जिलों में शामिल हो सकता है। गुमला की आम्रपाली अब सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि महिला आत्मनिर्भरता, ग्रामीण विकास और आधुनिक कृषि की नई पहचान बन चुकी है।

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