रांची। समग्र शिक्षा अभियान के तहत 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का स्कूलों में नामांकन सुनिश्चित करने के प्रयासों के बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी शिक्षा से दूर हैं। पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक कारणों से कई बच्चे अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं। अब सरकार ने ऐसे बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नई पहल शुरू की है।

सरकार ने निर्णय लिया है कि स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (NIOS) के माध्यम से मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत बच्चों को दूरस्थ माध्यम से पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा और परीक्षा पास करने के बाद उन्हें NIOS का मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

योजना के अनुसार, पारिवारिक और सामाजिक कारणों से स्कूल से बाहर रह रहे 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का नामांकन मैट्रिक स्तर की पढ़ाई के लिए किया जाएगा। वहीं, 16 से 18 वर्ष के बच्चों को इंटरमीडिएट में प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि, इंटरमीडिएट में नामांकन के लिए बच्चों का मैट्रिक उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा।

सरकार का उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है, जो किसी कारण से नियमित स्कूलों में पढ़ाई जारी नहीं रख सके। इसके माध्यम से उन्हें अपनी अधूरी शिक्षा पूरी करने का मौका मिलेगा और वे आगे की पढ़ाई या रोजगार के लिए बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे।

समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकार पहले से ही बच्चों के स्कूल नामांकन, उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इसके बावजूद कुछ बच्चे पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक समस्याओं, सामाजिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से स्कूल से बाहर हो जाते हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें NIOS से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर सर्वे और जागरूकता अभियान चलाया जा सकता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके।

NIOS के माध्यम से पढ़ाई करने वाले बच्चों को नियमित स्कूल जाने की बाध्यता नहीं होगी। वे अपनी परिस्थितियों के अनुसार पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। यह व्यवस्था खासतौर पर उन बच्चों के लिए मददगार होगी, जो काम, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य कारणों से स्कूल नहीं जा पाते हैं।

सरकार का मानना है कि शिक्षा से वंचित बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ना जरूरी है, क्योंकि शिक्षा उनके भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन बच्चों के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार के रास्ते खुल सकते हैं।

NIOS देशभर में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से स्कूली स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराता है। इसके प्रमाणपत्रों को मान्यता प्राप्त है और इन्हें आगे की पढ़ाई व प्रतियोगी परीक्षाओं में भी स्वीकार किया जाता है।

अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत बच्चों को पाठ्य सामग्री, परीक्षा प्रक्रिया और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का प्रयास है कि कोई भी बच्चा केवल सामाजिक या आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए लचीली शिक्षा व्यवस्था जरूरी है। नियमित स्कूलों में लौटना हर बच्चे के लिए संभव नहीं होता, ऐसे में NIOS जैसी व्यवस्था उन्हें अपनी गति से पढ़ाई पूरी करने का अवसर देती है।

शिक्षा विभाग इस योजना को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन, स्कूलों और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा। बच्चों की पहचान से लेकर नामांकन और परीक्षा तक की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया जाएगा।

सरकार की इस पहल से उन हजारों बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो किसी कारण से अपनी स्कूली शिक्षा बीच में छोड़ चुके हैं। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

फिलहाल योजना को लागू करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आने वाले समय में स्कूल से बाहर बच्चों का सर्वे कर उन्हें NIOS से जोड़ने का काम किया जाएगा।

Tags: