कर्नाटक में हाथी के हमले में 53 वर्षीय व्यक्ति की मौत, वन विभाग ने जांच शुरू की

Update: 2026-08-03 05:11 GMT

कर्नाटक : दक्षिण कन्नड़ जिले में हाथी के हमले की एक घटना में 53 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। घटना शनिवार शाम उपिनंगडी फॉरेस्ट रेंज के रेख्या गांव में हुई। मृतक की पहचान बालकृष्ण गौड़ा के रूप में हुई है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

उपिनंगडी रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर एचपी राघवेंद्र के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हाथी का हमला शाम करीब 5.30 बजे से 7.30 बजे के बीच हुआ। बताया गया कि बालकृष्ण गौड़ा अपने काम से लौट रहे थे, इसी दौरान रास्ते में उनका सामना हाथी से हो गया।

वन विभाग के अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। मौके पर मिले हाथी के पैरों के निशानों से संकेत मिला है कि क्षेत्र में एक अकेला हाथी मौजूद था। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच के आधार पर माना जा रहा है कि इसी हाथी ने हमला किया होगा।

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी है ताकि हाथी की गतिविधियों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में समय-समय पर जंगली जानवरों की आवाजाही देखी जाती रही है। जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों को अक्सर वन्यजीवों के खतरे का सामना करना पड़ता है। हाथियों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि ग्रामीण जंगल के आसपास के क्षेत्रों में अकेले जाने से बचें और किसी भी जंगली जानवर की मौजूदगी की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।

बालकृष्ण गौड़ा की मौत के बाद उनके परिवार में शोक का माहौल है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की ओर से परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि नियमों के अनुसार पीड़ित परिवार को सहायता प्रदान की जाएगी।

दक्षिण कन्नड़ और आसपास के वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही पहले भी चिंता का विषय रही है। जंगलों के आसपास कृषि भूमि और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण कई बार हाथी भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति बनती है।

वन विभाग ऐसे क्षेत्रों में निगरानी रखने के लिए गश्त बढ़ाता है और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाता है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि आने वाले समय में ऐसी घटनाओं को कम किया जा सके।

फिलहाल वन विभाग ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई है। अधिकारियों की टीम हाथी की पहचान और उसकी गतिविधियों का पता लगाने में जुटी हुई है। यदि जरूरत पड़ी तो हाथी की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए विशेष कदम भी उठाए जा सकते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती को सामने ला दिया है। जंगल से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

बालकृष्ण गौड़ा की मौत के मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। फिलहाल वन विभाग ग्रामीणों से सावधानी बरतने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना देने की अपील कर रहा है।

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