बेंगलुरु। कर्नाटक में दूध और दही की कीमतों में बढ़ोतरी से परेशान उपभोक्ताओं को अब एक और झटका लगा है। राज्य के लोकप्रिय नंदिनी ब्रांड के उत्पाद महंगे होने के बाद निजी डेयरी कंपनियों ने भी दूध और दही के दाम बढ़ा दिए हैं। मदर डेयरी, हेरिटेज और डोडला जैसे प्रमुख ब्रांडों की कीमतों में वृद्धि से आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित होने लगा है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि नंदिनी के उत्पाद महंगे होने के बाद उपभोक्ता निजी कंपनियों का रुख कर सकते हैं, लेकिन अब इन कंपनियों की ओर से भी कीमतें बढ़ाए जाने के कारण ग्राहकों के सामने सस्ते विकल्पों की चुनौती खड़ी हो गई है।
कर्नाटक सरकार और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) ने एक नवंबर 2026 से नंदिनी ब्रांड के दूध और दही की नई कीमतें लागू की थीं। सामान्य दूध की कीमत में आठ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जबकि कुछ विशेष किस्मों के दूध की कीमतों में इससे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त नंदिनी दही की कीमत में भी 14 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई थी।
नंदिनी उत्पादों की कीमतें बढ़ने के बाद राज्यभर में विरोध शुरू हो गया। उपभोक्ताओं, होटल कारोबारियों और विपक्षी दलों ने मूल्यवृद्धि पर नाराजगी जताई। इसी बीच निजी डेयरी कंपनियों ने भी अपने उत्पादों की नई कीमतें लागू कर दी हैं।
कन्नड़ मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मदर डेयरी ने दूध की कीमत में दो रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। वहीं, हेरिटेज कंपनी ने दूध की कीमत में अधिकतम 5.90 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। डोडला डेयरी ने भी दूध के दाम छह रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं।
दूध के साथ-साथ निजी ब्रांडों का दही भी महंगा हो गया है। हेरिटेज कंपनी ने एक लीटर दही की कीमत में 14 रुपये की वृद्धि की है, जबकि डोडला ने दही के दाम छह रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं।
मदर डेयरी, हेरिटेज और डोडला के अलावा तिरुमला जैसे अन्य निजी डेयरी ब्रांडों की कीमतों में भी बदलाव की खबर है। हालांकि, तिरुमला के उत्पादों में हुई वृद्धि की सटीक राशि की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है।
कीमतों में इस वृद्धि का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जो रोजाना दूध और दही खरीदते हैं। विशेष रूप से मध्यमवर्गीय और सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का विषय बन सकता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई परिवार रोजाना दो लीटर दूध खरीदता है और उसके पसंदीदा ब्रांड ने कीमत छह रुपये प्रति लीटर बढ़ाई है, तो उसे प्रतिदिन 12 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इस हिसाब से 30 दिनों में दूध का खर्च लगभग 360 रुपये बढ़ सकता है। दही की खरीदारी जोड़ने पर मासिक खर्च में और वृद्धि होगी।
इस मूल्यवृद्धि का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। होटल, रेस्टोरेंट, चाय की दुकानों, मिठाई कारोबारियों और छोटे खाद्य व्यवसायों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। दूध और दही कई खाद्य पदार्थों की तैयारी में इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में कच्चे माल की लागत बढ़ने से कारोबारियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
नंदिनी दूध और दही की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद बेंगलुरु के होटल संगठनों ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि दूध के साथ दही की कीमतों में एकमुश्त बड़ी वृद्धि से होटल उद्योग की लागत बढ़ेगी।
कर्नाटक सरकार ने दूध की कीमत बढ़ाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि इसका मुख्य उद्देश्य दुग्ध उत्पादक किसानों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करना है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर आठ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी में से सात रुपये किसानों को और एक रुपया दुग्ध सहकारी संस्थाओं को देने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का तर्क है कि पशुपालन की लागत लगातार बढ़ रही है। पशु आहार, चारा, परिवहन और रखरखाव पर अधिक खर्च होने के कारण किसान बेहतर दूध खरीद मूल्य की मांग कर रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए कीमतों में संशोधन किया गया।
हालांकि, उपभोक्ताओं का सवाल है कि किसानों को उचित मूल्य देने के साथ-साथ आम लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। दूध दैनिक जरूरत की वस्तु है। बच्चों, बुजुर्गों और अन्य परिवार के सदस्यों के आहार में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
नंदिनी दही की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर भी विवाद सामने आया था। पहले एक लीटर नंदिनी दही की कीमत 54 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 68 रुपये कर दिया गया था। इस तरह एक लीटर दही 14 रुपये महंगा हो गया।
विरोध बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन से दही की कीमत पर पुनर्विचार करने को कहा। इसके बाद दही की कीमत दो रुपये प्रति लीटर कम करने पर सहमति बनी। हालांकि, दूध की कीमत में की गई आठ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को वापस लेने का फैसला नहीं हुआ है।
इस बीच निजी कंपनियों के दाम बढ़ाने से बाजार में नई स्थिति पैदा हो गई है। पहले कुछ उपभोक्ता नंदिनी के बजाय निजी ब्रांडों के उत्पाद खरीदने पर विचार कर रहे थे, लेकिन अब उन उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने से उन्हें ज्यादा विकल्प नहीं मिल पा रहे हैं।
बाजार में डेयरी उत्पादों की कीमतें दूध की गुणवत्ता, वसा की मात्रा, पैकेट के आकार और कंपनी के अनुसार अलग-अलग होती हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग ब्रांडों की कीमतों की तुलना करना महत्वपूर्ण हो गया है।
निजी डेयरी कंपनियों की ओर से कीमतों में बदलाव के पीछे दूध खरीद लागत और अन्य परिचालन खर्च भी संभावित कारण हो सकते हैं। हालांकि, इन कंपनियों के ताजा मूल्य संशोधन के लिए अलग-अलग आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं हैं।
कर्नाटक में दूध की नई कीमतों को लेकर राजनीतिक विवाद भी जारी है। विपक्षी भाजपा राज्य सरकार से नंदिनी उत्पादों की बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने की मांग कर रही है। वहीं, सरकार किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लिए गए निर्णय को आवश्यक बता रही है।
चार नवंबर को बेंगलुरु में दूध की कीमतों से जुड़े मुद्दों पर बमूल की एक पत्रकार वार्ता भी प्रस्तावित थी। रिपोर्ट के अनुसार, बमूल अध्यक्ष डीके सुरेश और डेयरी क्षेत्र के अन्य पदाधिकारियों की भागीदारी वाली इस पत्रकार वार्ता को अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया गया।
फिलहाल नंदिनी के बाद निजी डेयरी कंपनियों की कीमतों में बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डेयरी कंपनियां अपने नए दाम बरकरार रखती हैं या जनता के विरोध और बाजार की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए इनमें कोई बदलाव करती हैं।