बेंगलुरु: कर्नाटक में अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने मांग की है कि राज्य की जनता को बताया जाना चाहिए कि बी. नागेंद्र ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दिया था।

विजयेंद्र ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि बीजेपी अपने उस रुख पर कायम है, जिसमें उसने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नागेंद्र अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित 185 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आरोपी हैं और इस मामले में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत विरोध करना नहीं है, बल्कि जनता के सामने पूरे मामले की सच्चाई आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नागेंद्र को खुद स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं, जिनके कारण उन्हें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा।

विजयेंद्र ने कहा कि बीजेपी को बी. नागेंद्र से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर नागेंद्र जांच प्रक्रिया में अपनी बेगुनाही साबित कर देते हैं तो पार्टी को उनके दोबारा मंत्री बनने पर कोई आपत्ति नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि मामला करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है और जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी निगम में इतनी बड़ी राशि से जुड़े आरोप कैसे सामने आए। उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग की।

अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े इस मामले ने कर्नाटक की राजनीति में काफी हलचल पैदा की थी। आरोप लगाया गया था कि निगम के पैसों में कथित गड़बड़ी हुई है। मामले की जांच के दौरान कई सवाल उठे और इसके बाद तत्कालीन मंत्री बी. नागेंद्र को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

बीजेपी लगातार इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमला करती रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार को मामले की पूरी जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं, कांग्रेस सरकार की ओर से मामले को लेकर जांच और कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया जाता रहा है। सरकार का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

विजयेंद्र ने कहा कि यदि नागेंद्र खुद को निर्दोष साबित कर देते हैं तो बीजेपी उनके खिलाफ कोई राजनीतिक विरोध नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रही है।

बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को इस मामले पर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नागेंद्र पर लगे आरोप गलत थे तो उन्हें इस्तीफा क्यों देना पड़ा।

कर्नाटक में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। बीजेपी इसे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे जांच से जुड़ा मामला बताकर देख रही है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कर्नाटक में यह मामला आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है। विपक्ष लगातार इसे लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि कांग्रेस सरकार जांच प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ने की बात कर रही है।

फिलहाल बी. वाई. विजयेंद्र के बयान के बाद एक बार फिर नागेंद्र के इस्तीफे और अनुसूचित जनजाति विकास निगम मामले को लेकर सियासी गर्मी बढ़ गई है। अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस और बी. नागेंद्र की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है।

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