संरक्षित इलाकों के ग्रामीणों के पुनर्वास प्रस्ताव को केंद्र ने किया खारिज

Update: 2026-07-28 09:37 GMT

बेंगलुरु। केंद्र सरकार ने कर्नाटक के उस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जिसमें राज्य ने संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के पुनर्वास और उन्हें दूसरी जगह बसाने के लिए अपने हिस्से के फंड का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी थी। केंद्र के इस फैसले के बाद वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

यह जानकारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में दी गई। बीजेपी सांसद जग्गेश की ओर से पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि कर्नाटक सरकार की ओर से इस संबंध में एक प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे कम्पेनसेटरी ए फॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी (CAMPA) के समक्ष रखा गया था। हालांकि, प्रस्ताव पर विचार के बाद इसे स्वीकार नहीं किया गया।

कर्नाटक सरकार की मांग थी कि संरक्षित वन क्षेत्रों और अन्य संवेदनशील इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए राज्य के हिस्से में उपलब्ध धनराशि का उपयोग करने की अनुमति दी जाए। राज्य सरकार का तर्क था कि कई ग्रामीण लंबे समय से ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं, जहां मानव गतिविधियों और वन संरक्षण के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

राज्य सरकार का मानना था कि यदि इन परिवारों को उचित मुआवजे और सुविधाओं के साथ दूसरी जगह बसाया जाता है तो इससे वन क्षेत्रों के संरक्षण में मदद मिल सकती है। साथ ही, स्थानीय लोगों को बेहतर जीवन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

हालांकि, केंद्र सरकार ने CAMPA फंड के उपयोग को लेकर राज्य के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस तरह के फंड के इस्तेमाल के लिए निर्धारित नियम और दिशा-निर्देश हैं, जिनके तहत प्रस्तावों की समीक्षा की जाती है।

CAMPA फंड का मुख्य उद्देश्य वन भूमि के गैर-वन उपयोग के कारण होने वाली क्षति की भरपाई के लिए पौधरोपण और वन संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इस फंड का उपयोग वन क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों के लिए किया जाता है।

कर्नाटक में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां ग्रामीण समुदाय लंबे समय से वन क्षेत्रों के आसपास निवास कर रहे हैं। इनमें से कई इलाकों को राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य या अन्य संरक्षित क्षेत्रों के अंतर्गत रखा गया है। इन क्षेत्रों में मानव आबादी और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षित क्षेत्रों से लोगों का स्वैच्छिक पुनर्वास तभी सफल हो सकता है, जब प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता, आवास, रोजगार और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।

कर्नाटक सरकार लंबे समय से वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास की जरूरत पर जोर देती रही है। राज्य सरकार का कहना है कि कई परिवारों को सुरक्षित और बेहतर जीवन देने के साथ-साथ वन संरक्षण के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पुनर्वास योजनाएं जरूरी हैं।

वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि पुनर्वास योजनाओं को लागू करते समय स्थानीय समुदायों के अधिकारों और उनकी आजीविका का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वन क्षेत्रों में रहने वाले कई समुदायों का जीवन प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी भी योजना को तैयार करते समय उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

राज्यसभा में दिए गए जवाब के बाद अब कर्नाटक सरकार को अपने पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए अन्य वित्तीय विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। राज्य सरकार अपने बजट या अन्य योजनाओं के माध्यम से इन परिवारों के पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

केंद्र के इस फैसले से एक बार फिर CAMPA फंड के उपयोग और उसके उद्देश्य को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर वन संरक्षण के लिए इस फंड का सही इस्तेमाल जरूरी माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास जैसे मानवीय मुद्दों के समाधान की आवश्यकता भी सामने आ रही है।

फिलहाल कर्नाटक सरकार की ओर से इस फैसले पर आगे की रणनीति को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए किस वैकल्पिक व्यवस्था को अपनाती है।

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