बेंगलुरु : कर्नाटक में कमजोर मानसून और बारिश की कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार से राज्य में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जल्द सर्वे और समय पर सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने अपने पत्र में कहा कि कम मानसूनी बारिश का असर राज्य में खेती, जलाशयों के जलस्तर और ग्रामीण क्षेत्रों की आजीविका पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्थिति का समय रहते आकलन किया जाना जरूरी है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत और सहायता की योजना तैयार की जा सके।
शिवकुमार ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि सूखे की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए जल्द से जल्द एक केंद्रीय टीम कर्नाटक भेजी जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय टीम के आकलन के आधार पर राज्य को आवश्यक सहायता मिल सकेगी और किसानों तथा ग्रामीण आबादी को राहत पहुंचाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल राज्य में बारिश की स्थिति संतोषजनक नहीं रही है। कम बारिश के कारण कई इलाकों में बुवाई प्रभावित हुई है। किसानों को फसलों की तैयारी और खेती से जुड़े कामों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मानसून की कमी का सीधा असर जल संसाधनों पर भी पड़ा है। राज्य के कई जलाशयों में पानी का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। इससे सिंचाई व्यवस्था और पेयजल उपलब्धता को लेकर भी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका पर भी बारिश की कमी का प्रभाव पड़ रहा है। कृषि पर निर्भर बड़ी आबादी के लिए कमजोर मानसून आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में समय पर राहत उपाय शुरू करना बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र से अपील की कि सूखे की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने स्तर पर जरूरी कदम उठा रही है, लेकिन व्यापक राहत और सहायता के लिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता है।
कर्नाटक में मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग और राज्य प्रशासन बारिश से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, कम बारिश वाले क्षेत्रों की पहचान कर स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई इलाकों में बुवाई में देरी हुई है। वहीं, कुछ क्षेत्रों में फसलों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि यदि सूखे की स्थिति को लेकर जल्द निर्णय लिया जाता है तो प्रभावित जिलों में राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसमें किसानों को सहायता, पेयजल व्यवस्था और अन्य जरूरी उपाय शामिल हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने अपने पत्र में केंद्र से सहयोग की उम्मीद जताते हुए कहा कि कर्नाटक की मौजूदा स्थिति का वैज्ञानिक और निष्पक्ष आकलन जरूरी है। केंद्रीय टीम के आने से वास्तविक स्थिति सामने आएगी और उसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जा सकेगी।
गौरतलब है कि मानसून कर्नाटक की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य के कई हिस्सों में खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर है। ऐसे में बारिश में कमी का असर सीधे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से केंद्र के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। यदि केंद्रीय टीम भेजी जाती है तो वह प्रभावित इलाकों का दौरा कर सूखे की स्थिति, फसल नुकसान और जल संसाधनों की उपलब्धता का आकलन करेगी।
कर्नाटक सरकार को उम्मीद है कि केंद्र के सहयोग से सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे और प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिल पाएगी।