बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों के लिए 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए जमीन अधिग्रहण के लिए बेहतर मुआवजा देने का फैसला कर रही है। उन्होंने राज्य के अन्य हिस्सों में भविष्य में होने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान भी इसी तरह का पैमाना अपनाने की अपील की।

मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बावजूद बिदादी में प्रस्तावित एआई सिटी परियोजना को लेकर किसानों का विरोध जारी है। किसान उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के सरकार के फैसले से नाराज हैं। उनका कहना है कि जमीन उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार है और केवल आर्थिक मुआवजा उनकी कृषि आधारित आय और भविष्य की सुरक्षा की भरपाई नहीं कर सकता।

पिछली सरकार से बढ़ा मुआवजा

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित मुआवजे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने जमीन देने वाले किसानों को 25 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा था।

शिवकुमार के मुताबिक, मौजूदा सरकार ने किसानों के हित में मुआवजे की राशि बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ करने का फैसला किया है। उन्होंने इसे किसानों के लिए बेहतर और अधिक लाभकारी व्यवस्था बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले किसानों को उचित लाभ मिले और उन्हें केवल जमीन के बाजार मूल्य तक सीमित मुआवजा न मिले।

असहमत किसानों के लिए दूसरा विकल्प

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो किसान 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के मुआवजे से सहमत नहीं होंगे, उन्हें विकसित जमीन का 50 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। सरकार की ओर से यह विकल्प किसानों को परियोजना के विकास में हिस्सेदारी देने के उद्देश्य से रखा गया है।

इस व्यवस्था के तहत किसानों को केवल तत्काल नकद मुआवजे के बजाय विकसित परियोजना क्षेत्र में जमीन का हिस्सा मिलने की संभावना होगी। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में विकसित क्षेत्र की बढ़ी हुई कीमत का लाभ किसानों को मिल सकता है।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर किसानों की प्रतिक्रिया और वे किन शर्तों पर जमीन देने के लिए तैयार होंगे, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।

जमीन अधिग्रहण का मुआवजा कई बातों पर निर्भर

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजा तय करने का कोई एक समान फार्मूला हर परियोजना पर लागू नहीं होता। मुआवजे की राशि जमीन की लोकेशन, उसकी प्रकृति और संबंधित विकास परियोजना की जरूरत समेत कई कारकों पर निर्भर करती है।

अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग इलाकों में जमीन का मूल्य अलग हो सकता है। इसके अलावा किसी परियोजना के लिए जमीन की आवश्यकता, विकास की संभावनाएं और अधिग्रहण से जुड़े अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है।

ऐसे में बिदादी के लिए घोषित 3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की राशि को लेकर सरकार की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने इसे भविष्य की परियोजनाओं के लिए भी एक उदाहरण के रूप में देखने की अपील की है।

किसानों की नाराजगी बरकरार

मुआवजे की घोषणा के बावजूद बिदादी के किसानों की मुख्य चिंता जमीन अधिग्रहण को लेकर बनी हुई है। प्रस्तावित एआई सिटी के लिए उपजाऊ कृषि भूमि का इस्तेमाल किए जाने को लेकर किसान विरोध कर रहे हैं।

किसानों का तर्क है कि कृषि भूमि केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि उनकी आजीविका का स्रोत है। जमीन चले जाने के बाद खेती से होने वाली नियमित आय खत्म हो सकती है। ऐसे में किसानों के लिए मुआवजे की राशि के साथ-साथ भविष्य की आजीविका का सवाल भी महत्वपूर्ण है।

किसानों की नाराजगी को देखते हुए सरकार के सामने विकास परियोजना को आगे बढ़ाने और प्रभावित लोगों की चिंताओं का समाधान करने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

AI सिटी को लेकर सरकार की बड़ी योजना

बिदादी में प्रस्तावित एआई सिटी परियोजना को राज्य सरकार भविष्य की तकनीकी और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के तौर पर देख रही है। ऐसी परियोजनाओं के जरिए निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को विकसित करने की योजना है।

सरकार का मानना है कि परियोजना से बिदादी और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया किसानों की सहमति और उनकी चिंताओं के बीच किस तरह आगे बढ़ती है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।

दूसरे क्षेत्रों के किसानों से भी अपील

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने राज्य के दूसरे हिस्सों के किसानों से भी अपील की कि भविष्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान इसी तरह के पैमाने को अपनाया जाए। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं से प्रभावित किसानों को उचित और बेहतर मुआवजा मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री की इस अपील को राज्य में जमीन अधिग्रहण की नीति को लेकर व्यापक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक परियोजना में जमीन के मूल्य और अन्य परिस्थितियों को अलग-अलग तरीके से देखना होगा।

विकास और किसानों के हित में संतुलन की चुनौती

बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट ने एक बार फिर विकास परियोजनाओं और कृषि भूमि के संरक्षण के बीच संतुलन का सवाल खड़ा कर दिया है। सरकार एक ओर बड़े स्तर की तकनीकी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं किसानों की जमीन और आजीविका की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।

3 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजे और विकसित जमीन का 50 प्रतिशत हिस्सा देने का विकल्प सरकार की ओर से किसानों को मनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन किसानों का विरोध बताता है कि केवल मुआवजे की राशि से मामला पूरी तरह हल होता नजर नहीं आ रहा।

अब सरकार के सामने चुनौती किसानों की आपत्तियों का समाधान करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने की है। आने वाले दिनों में मुआवजे की शर्तों, विकसित जमीन के विकल्प और कृषि भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों तथा सरकार के बीच बातचीत इस परियोजना की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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