कर्नाटक में फर्जी PhD सर्टिफिकेट से नौकरी पाने वाले 249 गेस्ट लेक्चरर्स पर कार्रवाई के निर्देश

Update: 2026-07-24 05:28 GMT

बेंगलुरु : कर्नाटक के सरकारी डिग्री कॉलेजों में फर्जी PhD सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले 249 गेस्ट लेक्चरर्स का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि इन अतिथि व्याख्याताओं ने नौकरी पाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज और तकनीकी शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

कॉलेज और तकनीकी शिक्षा विभाग के कमिश्नर ने 21 जुलाई को इस संबंध में एक आदेश जारी किया। आदेश में सरकारी डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे फर्जी PhD प्रमाणपत्र जमा कर नौकरी हासिल करने वाले गेस्ट लेक्चरर्स के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज कराएं। साथ ही, सभी कॉलेजों को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट विभाग को सौंपने को कहा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, कमिश्नर ने इस मामले को लेकर कॉलेज प्राचार्यों और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस भी की। बैठक में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले व्याख्याताओं की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। विभाग का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां गंभीर अनियमितता हैं, जो छात्रों और संस्थानों की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान कुछ गेस्ट लेक्चरर्स के PhD प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें कथित तौर पर कई प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए। जांच के बाद ऐसे 249 गेस्ट लेक्चरर्स की पहचान की गई है।

विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि ये फर्जी प्रमाणपत्र कहां से तैयार किए गए और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं। अधिकारियों की नजर उन एजेंसियों या संस्थानों पर भी है, जिनके नाम पर कथित रूप से फर्जी PhD प्रमाणपत्र जारी किए गए।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्ति के लिए योग्यता और प्रमाणपत्रों की जांच बेहद जरूरी है। यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक नियुक्त होते हैं तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है।

गेस्ट लेक्चरर्स की नियुक्ति आमतौर पर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए की जाती है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस मामले के सामने आने के बाद विभाग की सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित गेस्ट लेक्चरर्स की सेवाएं समाप्त करने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

वहीं, कॉलेज प्राचार्यों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने संस्थानों में नियुक्त सभी गेस्ट लेक्चरर्स के शैक्षणिक दस्तावेजों की समीक्षा करें और किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर तुरंत विभाग को सूचित करें।

इस मामले ने कर्नाटक की उच्च शिक्षा व्यवस्था में दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। शिक्षक पदों पर नियुक्ति में पारदर्शिता बनाए रखने और योग्य उम्मीदवारों को अवसर देने के लिए अब विभाग की ओर से सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है।

फिलहाल 249 गेस्ट लेक्चरर्स के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग की ओर से कॉलेजों से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि इस कथित फर्जीवाड़े का दायरा कितना बड़ा है और इसमें अन्य कितने लोग शामिल हैं।

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