बेंगलुरु। कर्नाटक में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्रियों को विभागों का बंटवारा नहीं होने से कांग्रेस के भीतर बढ़ रही नाराजगी अब पार्टी आलाकमान तक पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के रविवार शाम नई दिल्ली रवाना होने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि वह पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर मंत्रियों के बीच बढ़ती असंतुष्टि को दूर करने और विभागों के आवंटन को लेकर बने गतिरोध का समाधान निकालने की कोशिश कर सकते हैं।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने अभी तक शिवकुमार के संभावित दिल्ली दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद कांग्रेस के राजनीतिक हलकों में इस दौरे को लेकर चर्चा तेज है। सूत्रों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा नहीं होता है तो मंत्रियों को विभाग आवंटित करने में और देरी हो सकती है।

19 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ

कर्नाटक में 3 अगस्त को कैबिनेट विस्तार के पहले चरण में 19 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी। मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद सरकार के सामने अगली बड़ी चुनौती मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा करना है।

मंत्री पद की शपथ लिए कई दिन गुजर जाने के बावजूद विभागों का आवंटन नहीं होने से कांग्रेस के भीतर असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है। नए मंत्री अपने-अपने विभागों को लेकर इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि कुछ महत्वपूर्ण विभागों को लेकर नेताओं के बीच दावेदारी और राजनीतिक समीकरणों के कारण अंतिम फैसला लेने में समय लग रहा है।

कैबिनेट विस्तार के बाद सामान्य तौर पर मंत्रियों को जल्द ही विभागों की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है, ताकि वे प्रशासनिक कामकाज शुरू कर सकें। लेकिन इस बार विभागों के बंटवारे में देरी ने सरकार और पार्टी संगठन दोनों के लिए परेशानी बढ़ा दी है।

आलाकमान के हस्तक्षेप की जरूरत

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री शिवकुमार का संभावित दिल्ली दौरा इसी असंतोष को कम करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। पार्टी आलाकमान से चर्चा के दौरान मंत्रियों को विभाग आवंटित करने, महत्वपूर्ण मंत्रालयों के बंटवारे और पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

कांग्रेस नेतृत्व के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि कैबिनेट विस्तार के बाद यदि मंत्रियों के बीच नाराजगी बढ़ती है तो इसका असर सरकार के कामकाज पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है, सरकार किसी भी तरह की आंतरिक खींचतान को सार्वजनिक नहीं होने देना चाहेगी।

शिवकुमार के दिल्ली दौरे की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बावजूद कांग्रेस के अंदर इस बात की उम्मीद है कि जल्द ही विभागों के आवंटन पर फैसला हो सकता है।

मानसून सत्र से पहले समाधान की कोशिश

कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने मंत्रिमंडल से जुड़ी उलझन को जल्द सुलझाने की चुनौती है। सरकार के लिए यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष सरकार के हर फैसले और प्रशासनिक मुद्दे पर सवाल उठाने की तैयारी में रहता है।

यदि मंत्रियों को विभाग आवंटित नहीं होते हैं और कैबिनेट के भीतर असंतोष जारी रहता है, तो बीजेपी और जेडीएस इसे सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकते हैं। विपक्ष यह सवाल उठा सकता है कि जब मंत्रियों को जिम्मेदारियां ही नहीं दी गई हैं तो सरकार प्रशासनिक कामकाज किस तरह चला रही है।

ऐसी स्थिति में सरकार को सदन के भीतर विपक्ष के हमलों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मुख्यमंत्री शिवकुमार मानसून सत्र शुरू होने से पहले इस विवाद का समाधान निकालना चाहते हैं।

विभागों को लेकर बढ़ सकती है खींचतान

कर्नाटक सरकार में कई महत्वपूर्ण विभाग ऐसे हैं जिन्हें लेकर राजनीतिक महत्व काफी अधिक है। वित्त, गृह, ऊर्जा, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, राजस्व और अन्य प्रमुख विभागों का बंटवारा सत्ता के संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल किए जाने के बाद यह तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि किस मंत्री को कौन-सा विभाग दिया जाए। साथ ही, पहले से जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्रियों के विभागों में बदलाव और नए मंत्रियों को महत्वपूर्ण मंत्रालय देने को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा चल रही है।

कांग्रेस नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना होगा कि विभागों का बंटवारा ऐसा हो जिससे सरकार के भीतर किसी एक समूह या क्षेत्र को अधिक महत्व दिए जाने की धारणा न बने। कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन का भी कैबिनेट गठन में खास महत्व रहता है।

विपक्ष को मुद्दा देने से बचना चाहती है सरकार

बीजेपी और जेडीएस पहले से ही राज्य सरकार पर प्रशासनिक फैसलों को लेकर निशाना साधते रहे हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों के आवंटन में देरी विपक्ष के लिए एक नया मुद्दा बन सकती है।

विपक्षी दल यह आरोप लगा सकते हैं कि कांग्रेस सरकार अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाने में व्यस्त है और इसका असर शासन पर पड़ रहा है। विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाए जाने की संभावना है।

सरकार के लिए इसलिए जरूरी है कि मंत्रियों को जल्द से जल्द विभाग सौंपे जाएं और कैबिनेट के सभी सदस्यों को स्पष्ट जिम्मेदारी दी जाए।

दिल्ली दौरे पर टिकी नजर

फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से डी.के. शिवकुमार के दिल्ली दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अगर वह दिल्ली जाते हैं तो पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ कैबिनेट के विभागों के बंटवारे और कांग्रेस के भीतर असंतोष को लेकर चर्चा अहम मानी जाएगी।

शिवकुमार के सामने एक ओर नए मंत्रियों को संतुष्ट करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार में राजनीतिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

13 अगस्त से शुरू होने वाले मानसून सत्र को देखते हुए सरकार के पास ज्यादा समय नहीं है। यदि विभागों का बंटवारा जल्द हो जाता है तो सरकार विधानसभा में अधिक मजबूती के साथ विपक्ष का सामना कर सकेगी। लेकिन देरी जारी रही तो कांग्रेस के भीतर की नाराजगी विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकती है।

ऐसे में आने वाले कुछ दिन कर्नाटक कांग्रेस और सरकार दोनों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा होता है या नहीं और पार्टी आलाकमान के साथ चर्चा के बाद मंत्रियों के विभागों को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति कब खत्म होती है।

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