कर्नाटक : सिलिकॉन सिटी बेंगलुरु में एक महिला पुलिसकर्मी के मानवीय व्यवहार की हर जगह सराहना हो रही है। पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा देने पहुंची एक महिला उम्मीदवार के आठ महीने के बच्चे के रोने पर महिला पुलिसकर्मी ने न सिर्फ उसे संभाला, बल्कि उसे लोरी गाकर शांत भी कराया। इस घटना ने पुलिस की संवेदनशील छवि को सामने रखा है।

यह भावुक घटना रविवार (2 अगस्त, 2026) को चेन्नमनाकेरे अचुकट्टू इलाके में स्थित कृष्णा कॉलेज परीक्षा केंद्र पर हुई। यहां पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा आयोजित की जा रही थी। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए तैनात महिला पुलिसकर्मी ने ड्यूटी के साथ-साथ एक मां की तरह बच्चे की देखभाल की।

जानकारी के अनुसार, एक महिला उम्मीदवार अपने आठ महीने के बच्चे के साथ परीक्षा देने पहुंची थी। परीक्षा शुरू होने से पहले जब वह परीक्षा कक्ष में जाने लगी, तभी बच्चा जोर-जोर से रोने लगा। छोटे बच्चे को रोता देखकर महिला उम्मीदवार परेशान हो गई और उसे समझ नहीं आ रहा था कि परीक्षा पर ध्यान दे या बच्चे को संभाले।

महिला उम्मीदवार की परेशानी देखकर चेन्नमनाकेरे अचुकट्टू पुलिस स्टेशन में तैनात महिला पुलिसकर्मी आगे आईं। उन्होंने उम्मीदवार को भरोसा दिलाया कि वह बिना किसी चिंता के परीक्षा दे सकती हैं और बच्चे की देखभाल वे करेंगी।

महिला पुलिसकर्मी ने बच्चे को अपनी गोद में लिया और उसे शांत करने की कोशिश की। उन्होंने बच्चे को प्यार से संभाला और कन्नड़ भाषा में गाई जाने वाली पारंपरिक लोरी ‘जोगुला’ गाकर उसे शांत किया। कुछ ही देर में बच्चा शांत हो गया, जिसके बाद उसकी मां बिना किसी तनाव के परीक्षा देने के लिए परीक्षा कक्ष में चली गई।

इस घटना के बाद परीक्षा केंद्र पर मौजूद लोगों ने महिला पुलिसकर्मी के इस व्यवहार की प्रशंसा की। कई लोगों ने कहा कि पुलिसकर्मी ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता का भी परिचय दिया।

पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारियों ने भी महिला कर्मचारी के इस कार्य की सराहना की। उनका कहना है कि पुलिस की भूमिका केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद करना भी पुलिस की जिम्मेदारी का हिस्सा है।

इस घटना ने उन महिला उम्मीदवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर किया है, जो छोटे बच्चों की जिम्मेदारियों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होती हैं। कई बार माताओं को परीक्षा और बच्चों की देखभाल के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई होती है।

महिला उम्मीदवार के लिए यह सहायता उस समय मिली, जब उसे परीक्षा पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत थी। पुलिसकर्मी के इस छोटे से सहयोग ने उसे मानसिक रूप से राहत दी और वह शांत वातावरण में परीक्षा दे सकी।

लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में सकारात्मक संदेश देती हैं। सरकारी सेवाओं में तैनात कर्मचारियों का संवेदनशील रवैया आम लोगों के लिए भरोसा बढ़ाता है।

पुलिस विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों को अक्सर कठिन परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी निभानी पड़ती है। इसके बावजूद जब कोई कर्मचारी मानवीय दृष्टिकोण अपनाता है तो उसकी अलग पहचान बनती है।

सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी इस घटना की चर्चा हो रही है। लोगों ने महिला पुलिसकर्मी के व्यवहार को मातृत्व और सेवा भावना का उदाहरण बताया है।

बेंगलुरु की इस घटना ने दिखाया कि वर्दी में रहते हुए भी संवेदनशीलता और सहानुभूति कितनी महत्वपूर्ण होती है। महिला पुलिसकर्मी ने अपनी ड्यूटी के साथ-साथ एक जरूरतमंद मां की मदद करके लोगों का दिल जीत लिया।

यह घटना उन सभी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अपने करियर और लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं। छोटे से सहयोग और समझदारी से किसी के लिए बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

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