Karnataka कर्नाटक: कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चालावादी नारायणस्वामी ने कहा कि कर्नाटक में ही पानी की कमी है और राज्य के पास लोगों की पेयजल जरूरतें पूरी करने के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कर्नाटक पर अतिरिक्त पानी देने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाले समय में अच्छी बारिश होती है और जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होता है, तो स्थिति को देखते हुए आगे का फैसला लिया जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह मौजूदा हालात के बारे में संबंधित पक्षों को समझाने के लिए प्रभावी प्रयास करे।
नारायणस्वामी ने कहा कि कर्नाटक पहले अपने लोगों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि पानी की उपलब्धता के आधार पर ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए। कावेरी जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का विषय रहा है। दोनों राज्यों के किसान और राजनीतिक दल समय-समय पर पानी के बंटवारे को लेकर अपनी मांगें उठाते रहे हैं।
कर्नाटक में जलाशयों में पानी की उपलब्धता, बारिश की स्थिति और किसानों की जरूरतों को लेकर सरकार लगातार समीक्षा करती रही है। वहीं, विपक्ष का कहना है कि राज्य में जल संकट की स्थिति को देखते हुए किसी भी जल रिलीज के फैसले में सावधानी बरती जानी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष के इस बयान के बाद कावेरी जल विवाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। अब नजर राज्य सरकार के अगले कदम और जल प्रबंधन को लेकर लिए जाने वाले फैसलों पर है।