Karnataka कर्नाटक: ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरकार बड़े रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स, गेटेड कम्युनिटी और व्यावसायिक परिसरों को सामूहिक रूप से अपने बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को पारंपरिक बिजली आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ सौर, पवन और अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों के अधिक उपयोग के लिए सक्षम बनाना है।
इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार बिजली उत्पादन की सुविधा मिलेगी। वे चाहें तो अपने परिसर में ही सौर या पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकेंगे या फिर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बिजली उत्पादन कर मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क के माध्यम से अपने परिसरों तक बिजली पहुंचा सकेंगे। इस व्यवस्था से ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सामूहिक बिजली उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित नीति विशेष रूप से बड़े आवासीय परिसरों, गेटेड कम्युनिटी, आईटी पार्क, औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। ऐसे परिसर सामूहिक रूप से निवेश कर अपने बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित कर सकेंगे और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ऊर्जा का उपयोग कर पाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिजली की लागत पर दीर्घकालिक नियंत्रण संभव होगा और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
सौर और पवन ऊर्जा पर रहेगा फोकस
सरकार की योजना में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है। उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा संयंत्र, पवन ऊर्जा परियोजनाएं और अन्य हरित ऊर्जा प्रणालियां स्थापित करने की अनुमति होगी।
यदि किसी परिसर में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है, तो उपभोक्ता दूरस्थ स्थान पर भी बिजली उत्पादन कर सकेंगे और ट्रांसमिशन नेटवर्क के माध्यम से उसका उपयोग कर पाएंगे। इससे उन उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा, जिनके पास अपने परिसर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है।
मौजूदा बिजली नेटवर्क का होगा उपयोग
योजना के अनुसार बिजली उत्पादन के बाद उसकी आपूर्ति के लिए मौजूदा ट्रांसमिशन और वितरण अवसंरचना का उपयोग किया जाएगा। इससे नए नेटवर्क के निर्माण की आवश्यकता कम होगी और पहले से उपलब्ध बिजली व्यवस्था का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
हालांकि, इस सुविधा का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को निर्धारित ट्रांसमिशन शुल्क और अन्य लागू शुल्क का भुगतान करना होगा।
KERC तय करेगा शुल्क
कर्नाटक विद्युत विनियामक आयोग (KERC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उपभोक्ताओं को आयोग द्वारा निर्धारित ट्रांसमिशन शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके अलावा संबंधित बिजली वितरण कंपनियां (ESCOMs) यदि कोई अतिरिक्त सेवा शुल्क निर्धारित करती हैं, तो उसका भुगतान भी करना होगा।
अधिकारियों के अनुसार, शुल्क निर्धारण का उद्देश्य व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना और बिजली वितरण प्रणाली पर पड़ने वाले खर्च की भरपाई करना है।
हितधारकों से ली जा रही राय
KERC इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित कर रहा है। इसके लिए विभिन्न हितधारकों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
इन बैठकों में ऊर्जा विशेषज्ञों, उपभोक्ता संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों, बिजली वितरण कंपनियों और अन्य संबंधित संस्थाओं की राय ली जा रही है ताकि अंतिम नीति व्यवहारिक और सभी पक्षों के हित में हो।
दूसरे राज्यों के मॉडल का अध्ययन
अधिकारियों ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में भी इस प्रकार की व्यवस्थाओं को लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है या ऐसी योजनाएं पहले से संचालित हैं।
इन राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर कर्नाटक में भी ऐसी नीति तैयार की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिल सकें और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिले।
उपभोक्ताओं को होंगे कई लाभ
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से बड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसरों को बिजली आपूर्ति में अधिक स्थिरता मिलेगी। साथ ही, लंबे समय में बिजली बिलों में कमी आने की संभावना भी रहेगी।
इसके अतिरिक्त, नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम
देशभर में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार नई नीतियां बना रही हैं। बड़े उपभोक्ताओं को स्वयं बिजली उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
यदि प्रस्तावित नीति को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो इससे न केवल बिजली क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और दक्षता बढ़ेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को अपनी ऊर्जा जरूरतों का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर भी मिलेगा। आने वाले समय में यह मॉडल शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।