बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार को अभिनेता दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें आरोपी प्रदोष राव को रेणुकास्वामी मर्डर केस में सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने की इजाज़त दी गई थी।
हाई कोर्ट ने 59वीं सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट (CCH) के आदेश को सही ठहराया, जिसने केस के 14वें आरोपी प्रदोष को सरकारी गवाह बनने की मंज़ूरी दी थी। जस्टिस वी. श्रीशानंद की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में दखल देने की कोई वजह नहीं है, क्योंकि बचाव पक्ष को क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान प्रदोष से सवाल पूछने का मौका मिलेगा।
सीनियर वकील के. दिवाकर ने प्रदोष की तरफ से दलील दी कि दर्शन के वकील ट्रायल में देरी करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकारी गवाह बनने की अर्ज़ी दाखिल होने के बाद भी दर्शन के वकीलों ने बार-बार आपत्तियां उठाईं।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्रदोष ने जेल मैनुअल के तहत मिली इजाज़त के अनुसार फोन पर बात की थी। जज ने कहा कि प्रदोष का फोन पर सरकारी गवाह बनने के अपने इरादे के बारे में बात करने में कुछ भी गलत नहीं है। जज ने टिप्पणी की, "अगर मैं फोन पर कहता हूं कि मैं सरकारी गवाह बनूंगा, तो इसमें क्या गलत है? अगर कोई पति अपनी पत्नी से उसकी राय पूछता है, तो इसमें क्या गलत है? अगर किसी और के उकसाने का सबूत हो, तो वह अलग बात है।"
दर्शन की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील हशमत पाशा ने तर्क दिया कि 10वें आरोपी विनय ने भी सरकारी गवाह बनने के लिए अर्ज़ी दाखिल की थी। फिर भी, उसकी अर्ज़ी पर विचार नहीं किया गया, जबकि प्रदोष की अर्ज़ी पर विचार किया गया। जज ने जवाब दिया कि यह मुद्दा 10वें आरोपी को उठाना चाहिए था और दर्शन के वकील उसकी तरफ से बहस नहीं कर सकते।
चित्रदुर्ग के रहने वाले रेणुकास्वामी का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था और जून 2024 में बेंगलुरु के पटनगेरे में एक शेड में लाया गया था। आरोप है कि उसने इंस्टाग्राम पर दर्शन की सहयोगी पवित्रा गौड़ा को अश्लील मैसेज भेजे थे। शेड में कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई और उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में दर्शन और पवित्रा गौड़ा समेत 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया। 14वें आरोपी प्रदोष पर सबूत मिटाने में मदद करने और अपराध से जुड़े पैसों के लेन-देन के आरोप हैं। उसने हाल ही में कोर्ट से सरकारी गवाह बनने की इजाज़त मांगी थी और कहा था कि वह कोर्ट के सामने मामले का पूरा सच बताने को तैयार है।
CCH कोर्ट ने उसकी अर्ज़ी मंज़ूर कर ली थी और उसे सरकारी गवाह बनने की इजाज़त दे दी थी। इसके बाद विजयलक्ष्मी ने रिट याचिका के ज़रिए ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।