बेंगलुरु। कर्नाटक के हनुआर इलाके में हुई गोलीबारी की घटना की मजिस्ट्रेट जांच कराने का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। उन्होंने बताया कि घटनास्थल से कई सामान और एक बंदूक जब्त की गई है, जबकि कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।

शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार को सुबह करीब पांच बजे घटना की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर कई तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमें सुबह पांच बजे इस बारे में जानकारी मिली। जांच के बाद ही सच्चाई पता चलेगी। जंगल वाले इलाके में गोलीबारी हुई थी। कई गवाह हैं, सामान और एक बंदूक जब्त की गई है। मीडिया भी कुछ जानकारियां दिखा रहा है। कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा है।”

घटना कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के अंतर्गत आने वाले रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में हुई बताई जा रही है। वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब पांच बजे वन विभाग के कर्मचारियों को इलाके में कथित अवैध शिकार की गतिविधि की जानकारी मिली थी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके की ओर गई, जहां उसका चार लोगों से सामना हुआ।

इसी दौरान गोलीबारी की घटना हुई। हालांकि गोली किस परिस्थिति में चली और सबसे पहले किस तरफ से गोलीबारी की गई, इसे लेकर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही गई है। राज्य सरकार ने इसी कारण मजिस्ट्रेट जांच कराने का फैसला किया है, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल की जा सके।

वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश इसलिए दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में घटनास्थल पर क्या हुआ था। जांच में विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि गोलीबारी जानबूझकर की गई थी या वन विभाग के कर्मचारियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी।

घटना रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में होने के कारण मामले की संवेदनशीलता बढ़ गई है। जंगलों में अवैध शिकार रोकने के लिए वन विभाग की टीमें नियमित रूप से गश्त करती हैं। कई बार वन्यजीवों का शिकार करने वाले लोगों के पास हथियार होने की आशंका रहती है, जिसके कारण वनकर्मियों के लिए कार्रवाई जोखिमपूर्ण हो जाती है। हालांकि इस मामले में वास्तविक परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने भी साफ किया है कि शुरुआती सूचनाओं के आधार पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। घटनास्थल से जब्त किए गए सामान, हथियार और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी गोली लगने और मौत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

मजिस्ट्रेट जांच के दौरान घटनास्थल की परिस्थितियों, गोलीबारी से पहले और बाद के घटनाक्रम, वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका तथा वहां मौजूद अन्य लोगों के बयानों की पड़ताल की जा सकती है। जब्त बंदूक की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि हथियार किसके पास था और घटना के दौरान उसका इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी कर्नाटक के महत्वपूर्ण संरक्षित वन क्षेत्रों में शामिल है। यहां वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीमें तैनात रहती हैं। संरक्षित क्षेत्र में शिकार जैसी गतिविधियों पर कानूनी प्रतिबंध है और ऐसी सूचना मिलने पर वन विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है।

वन मंत्री के अनुसार, शनिवार सुबह भी विभाग को अवैध शिकार से जुड़ी सूचना मिली थी। इसके बाद वनकर्मियों ने कार्रवाई की और उनका चार लोगों से सामना हुआ। इसी दौरान हुई गोलीबारी के बाद मामला गंभीर हो गया। सरकार अब यह जानना चाहती है कि कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं और किन परिस्थितियों में गोली चलाने की नौबत आई।

घटना के बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि उनकी भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की विस्तृत जानकारी जांच आगे बढ़ने के बाद स्पष्ट होगी। सरकार ने संकेत दिया है कि पूरे घटनाक्रम के तथ्यों को सामने लाने के लिए जांच को प्राथमिकता दी जाएगी।

शवों का पोस्टमार्टम भी जांच की महत्वपूर्ण कड़ी होगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण, गोली लगने की दिशा और अन्य चोटों के बारे में जानकारी मिल सकती है। इसके आधार पर जांच अधिकारी घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का मिलान कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि जांच के बाद सरकार पूरे मामले की जानकारी साझा करेगी। उनका कहना है कि घटना से जुड़े तथ्यों को सामने आने देना जरूरी है। सरकार ने फिलहाल मजिस्ट्रेट जांच के जरिए घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल कराने का रास्ता अपनाया है।

वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने भी स्पष्ट किया कि जांच का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि गोलीबारी किन परिस्थितियों में हुई। क्या गोली जानबूझकर चलाई गई या वन विभाग के कर्मचारियों ने खुद को खतरे में देखकर आत्मरक्षा में हथियार का इस्तेमाल किया, इस सवाल का जवाब जांच से मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल हनुआर गोलीबारी मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश के बाद सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। घटनास्थल से बरामद हथियार और अन्य सामान, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा वनकर्मियों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी होने के बाद घटना से संबंधित विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

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