बेंगलुरु। कर्नाटक में ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरों को समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने के मामले में सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने सोमवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि मजदूरी भुगतान में देरी और लापरवाही के लिए 308 पंचायत विकास अधिकारियों (PDO), 74 तालुक कार्यकारी अधिकारियों (EO) और 12 उप-सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत काम करने वाले मजदूरों को समय पर भुगतान करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।यह मामला 'विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी VB-G RAM G योजना से जुड़ा है। मंत्री ने 12 जिलों की 311 ग्राम पंचायतों में मजदूरी भुगतान में देरी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को धनराशि जारी होने के बावजूद अकुशल मजदूरों को उनकी मजदूरी नहीं मिलना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।
394 अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश
ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने मजदूरी भुगतान में देरी के मामले में कुल 394 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।इनमें 308 पंचायत विकास अधिकारी, 74 तालुक कार्यकारी अधिकारी और 12 उप-सचिव शामिल हैंमंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि मजदूरी भुगतान में हुई देरी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए।उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को निर्धारित समय के भीतर भुगतान सुनिश्चित करना आवश्यक है।हालांकि, कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश किसी अधिकारी को दोषी ठहराए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है। संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।
12 जिलों की 311 ग्राम पंचायतों में भुगतान में देरी
मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने 12 जिलों की 311 ग्राम पंचायतों में मजदूरी भुगतान में देरी पर नाराजगी जताई है।उन्होंने विभाग के सचिव और संबंधित 12 जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को लिखित निर्देश जारी किए।इन निर्देशों में मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं किए जाने के मामलों को गंभीरता से लेने को कहा गया है।मंत्री ने कहा कि ग्रामीण रोजगार योजना का उद्देश्य लोगों को रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।ऐसे में काम पूरा करने के बाद मजदूरों को मजदूरी के लिए इंतजार करना पड़े, तो योजना के उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।उन्होंने अधिकारियों को भुगतान में देरी की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रभावित मजदूरों की कुल संख्या और बकाया मजदूरी की राशि का उल्लेख नहीं किया गया है।
15 दिनों के भीतर भुगतान करने के थे निर्देश
मंत्री ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत काम करने वाले लाभार्थियों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके थे।इसके बावजूद कई ग्राम पंचायतों में मजदूरी भुगतान में देरी सामने आई है।मंत्री के अनुसार, यदि निर्धारित 15 दिनों की अवधि में मजदूरों को भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित पंचायत विकास अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।उन्होंने कहा कि भुगतान संबंधी निर्देशों का पालन करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।ग्रामीण रोजगार योजनाओं में मजदूरी का समय पर भुगतान महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रमिक अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इस आय पर निर्भर रहते हैं।भुगतान में देरी होने से मजदूरों और उनके परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।इसी कारण मंत्री ने इस मामले में जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है।
फंड जारी होने के बाद भी नहीं मिली मजदूरी
मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने इस बात पर विशेष नाराजगी व्यक्त की कि ग्राम पंचायतों को धनराशि जारी होने के बाद भी अकुशल मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही का मामला बताया।सामान्य तौर पर किसी रोजगार योजना के तहत धनराशि उपलब्ध होने के बाद संबंधित प्रक्रियाओं के अनुसार मजदूरी भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।हालांकि, इस मामले में किन प्रशासनिक कारणों से भुगतान में देरी हुई, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।मंत्री ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने के निर्देश देकर इस मामले में जवाबदेही निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।यह स्पष्ट होना बाकी है कि भुगतान में देरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं, तकनीकी समस्याओं या किसी अन्य कारण से हुई।
सूखे की स्थिति में मजदूरों की बढ़ी परेशानी
मंत्री ने कहा कि मजदूरी भुगतान में देरी का असर ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों पर पड़ रहा है।उन्होंने विशेष रूप से सूखे की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में रोजगार योजनाएं ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनती हैं।लेकिन यदि काम करने के बाद मजदूरी समय पर नहीं मिलती है, तो श्रमिकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।मंत्री के अनुसार, अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोग सूखे की स्थिति में भी VB-G RAM G योजना के कार्यों में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरी भुगतान में देरी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का पलायन हो रहा है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस पलायन से संबंधित कोई विशिष्ट संख्या या सर्वेक्षण का विवरण नहीं दिया गया है।
ग्रामीण मजदूरों की आजीविका पर असर
ग्रामीण रोजगार योजनाएं विशेष रूप से उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं, जिनकी आय कृषि और दैनिक मजदूरी पर निर्भर रहती है।कृषि कार्यों की उपलब्धता कम होने या सूखे जैसी परिस्थितियों में ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम मजदूरों को आय का एक अतिरिक्त अवसर प्रदान कर सकते हैं।ऐसे में मजदूरी भुगतान में देरी होने से परिवारों की आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने इसी समस्या को उठाते हुए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता बताई।उन्होंने कहा कि रोजगार योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।योजना के क्रियान्वयन में अधिकारियों की लापरवाही के कारण मजदूरों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
 पंचायत विकास अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर
ग्रामीण रोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।पंचायत विकास अधिकारी स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यों और योजनाओं से संबंधित प्रक्रियाओं में जिम्मेदारी निभाते हैं।मंत्री ने स्पष्ट किया कि मजदूरी भुगतान में निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं होने पर संबंधित पंचायत विकास अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।इसी आधार पर 308 पंचायत विकास अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।इसके अलावा 74 तालुक कार्यकारी अधिकारियों और 12 उप-सचिवों को भी नोटिस जारी करने को कहा गया है।इससे स्पष्ट है कि मंत्री ने भुगतान में देरी को केवल ग्राम पंचायत स्तर तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी जवाब मांगा है।
विभागीय सचिव और जिला पंचायत CEO को लिखित निर्देश
ईश्वर बी. खंड्रे ने विभागीय सचिव और 12 जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को लिखित निर्देश जारी किए हैं।इन निर्देशों में संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और मजदूरी भुगतान में देरी के मामलों पर कार्रवाई करने को कहा गया है।मंत्री ने 311 ग्राम पंचायतों में सामने आई भुगतान संबंधी समस्याओं पर नाराजगी जताई।उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत मजदूरों को समय पर भुगतान करने के निर्देशों का पालन होना चाहिए।हालांकि, उपलब्ध विवरण में नोटिस का जवाब देने की समयसीमा या आगे की विभागीय कार्रवाई का कार्यक्रम स्पष्ट नहीं किया गया है।संबंधित अधिकारियों से जवाब मिलने के बाद ही जिम्मेदारी और संभावित कार्रवाई के बारे में अधिक जानकारी सामने आ सकेगी।
मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने पर सरकार का जोर
कर्नाटक सरकार के ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य मजदूरी भुगतान में देरी को लेकर जवाबदेही तय करना है।मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को निर्धारित समय में भुगतान मिलना चाहिए।उन्होंने ग्राम पंचायतों को धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद मजदूरी नहीं दिए जाने को गंभीर मामला बताया।इसके साथ ही सूखे की स्थिति में रोजगार के अवसरों से मजदूरों की दूरी और पलायन पर भी चिंता जताई।फिलहाल 308 पंचायत विकास अधिकारियों, 74 तालुक कार्यकारी अधिकारियों और 12 उप-सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।इस मामले में संबंधित अधिकारियों के जवाब और विभागीय समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
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