बेंगलुरु। कर्नाटक में बाघ के बच्चों को दोबारा जंगल में रहने के लिए तैयार करने के उद्देश्य से प्रस्तावित राज्य के पहले रीवाइल्डिंग सेंटर की स्थापना को बड़ा झटका लगा है। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही इस परियोजना का भद्रा टाइगर रिजर्व (BTR) में स्थानीय समुदायों और पर्यावरणविदों ने कड़ा विरोध किया है। लगातार विरोध के चलते वन विभाग ने फिलहाल परियोजना से जुड़ा काम पूरी तरह रोक दिया है। अब विभाग इस केंद्र को स्थापित करने के लिए बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में वैकल्पिक स्थान तलाश रहा है। हालांकि, इन दोनों वन क्षेत्रों में बाघों की बड़ी संख्या होने के कारण उपयुक्त जगह का चयन करना आसान नहीं है। कर्नाटक सरकार मध्य प्रदेश में स्थापित रीवाइल्डिंग सेंटर के मॉडल को अपनाना चाहती है, ताकि बचाए गए बाघ के बच्चों को सुरक्षित वातावरण में प्रशिक्षण देकर भविष्य में जंगल में छोड़ा जा सके।

कर्नाटक में प्रस्तावित यह रीवाइल्डिंग सेंटर राज्य की वन्यजीव संरक्षण योजनाओं में एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा था। इसका उद्देश्य ऐसे बाघ के बच्चों को जंगल में रहने के लिए तैयार करना है, जिन्हें किसी कारण से बचाया गया हो और जो तत्काल प्राकृतिक वातावरण में रहने के लिए तैयार नहीं हों।

इस परियोजना के तहत वन क्षेत्र के एक हिस्से में विशेष बाड़ा बनाने की योजना तैयार की गई थी। इस बाड़े में बचाए गए बाघ के बच्चों को रखा जाना था, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल हो सकें।

रीवाइल्डिंग सेंटर की अवधारणा वन्यजीवों को दोबारा प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार करने से जुड़ी है। विशेष रूप से बाघ जैसे वन्यजीवों के मामले में यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि जंगल में जीवित रहने के लिए उन्हें प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यवहार करना आवश्यक होता है।

कर्नाटक सरकार ने इसी उद्देश्य से मध्य प्रदेश में स्थापित रीवाइल्डिंग सेंटर के मॉडल में रुचि दिखाई थी। सरकार की योजना इस मॉडल को राज्य में लागू करने की थी।

शुरुआत में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भद्रा टाइगर रिजर्व को चुना गया। यहां रीवाइल्डिंग सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा था।

हालांकि, परियोजना को स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा। भद्रा टाइगर रिजर्व के आसपास के समुदायों और पर्यावरणविदों ने प्रस्तावित केंद्र का कड़ा विरोध किया।

विरोध के बाद वन विभाग को परियोजना का काम रोकना पड़ा। फिलहाल भद्रा टाइगर रिजर्व में रीवाइल्डिंग सेंटर की स्थापना से संबंधित गतिविधियां बंद कर दी गई हैं।

इस फैसले के बाद कर्नाटक के पहले रीवाइल्डिंग सेंटर की स्थापना को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अब नए स्थान का चयन करना आवश्यक हो गया है।

वन विभाग ने भद्रा टाइगर रिजर्व के स्थान पर अन्य संभावित वन क्षेत्रों की तलाश शुरू की है। इस क्रम में बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व को विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, इन दोनों क्षेत्रों में भी परियोजना स्थापित करने के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। बांदीपुर और नागरहोल में पहले से ही बाघों की बड़ी संख्या मौजूद है।

ऐसे में रीवाइल्डिंग सेंटर के लिए ऐसा स्थान चुनना जरूरी होगा, जहां बचाए गए बाघ के बच्चों को रखने और उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा सके।

इन वन क्षेत्रों में बाघों की मौजूदा आबादी को देखते हुए उपयुक्त स्थान का चयन वन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है।

रीवाइल्डिंग सेंटर की स्थापना के लिए केवल जंगल में खाली जगह उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। परियोजना के उद्देश्य के अनुसार ऐसा वातावरण आवश्यक होगा, जहां बाघ के बच्चों को प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जा सके।

प्रस्तावित योजना के अनुसार, जंगल के एक हिस्से में विशेष बाड़ा बनाया जाएगा। इस बाड़े में बचाए गए बाघ के बच्चों को रखा जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य बाघ के बच्चों को नियंत्रित वातावरण में रखते हुए जंगल में रहने के लिए तैयार करना है।

कर्नाटक सरकार जिस मॉडल को अपनाना चाहती है, वह मध्य प्रदेश में स्थापित रीवाइल्डिंग सेंटर की अवधारणा पर आधारित है।

इस मॉडल के माध्यम से बचाए गए बाघ के बच्चों को सीधे जंगल में छोड़ने के बजाय पहले विशेष व्यवस्था में रखने की योजना है।

इसके बाद उन्हें प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, कर्नाटक में प्रस्तावित केंद्र के संचालन और प्रशिक्षण की विस्तृत प्रक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

भद्रा टाइगर रिजर्व में परियोजना का विरोध होने के बाद अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि वन विभाग वैकल्पिक स्थान का चयन किस आधार पर करेगा।

स्थानीय समुदायों और पर्यावरणविदों की आपत्तियों को देखते हुए परियोजना के भविष्य को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में विरोध के सभी कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि स्थानीय समुदायों और पर्यावरणविदों ने किन विशेष मुद्दों को लेकर परियोजना का विरोध किया था।

इसी तरह वन विभाग ने भद्रा टाइगर रिजर्व में काम रोकने के बाद परियोजना को दोबारा शुरू करने की कोई निश्चित तारीख घोषित की है या नहीं, इसकी जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।

फिलहाल विभाग का ध्यान बांदीपुर और नागरहोल में उपयुक्त स्थान की तलाश पर केंद्रित है।

कर्नाटक में बाघों के संरक्षण को लेकर प्रस्तावित यह केंद्र विशेष महत्व रखता है। इसका उद्देश्य बचाए गए बाघ के बच्चों को भविष्य में प्राकृतिक आवास में लौटने के लिए तैयार करना है।

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में ऐसी परियोजनाओं की सफलता के लिए उपयुक्त स्थान, सुरक्षित वातावरण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।

भद्रा टाइगर रिजर्व में परियोजना का काम बंद होने से अब इसकी स्थापना की प्रक्रिया में देरी की स्थिति बन गई है।

वन विभाग को वैकल्पिक स्थान की तलाश के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित केंद्र का संचालन उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप हो सके।

बांदीपुर और नागरहोल में बाघों की बड़ी संख्या इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना रही है। इन क्षेत्रों में पहले से मौजूद बाघों के बीच बचाए गए शावकों के प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त जगह चुनना महत्वपूर्ण होगा।

रीवाइल्डिंग सेंटर का उद्देश्य सामान्य वन्यजीव देखभाल केंद्र से अलग है। यहां बचाए गए बाघ के बच्चों को जंगल के प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप तैयार करने की योजना है।

इसलिए केंद्र के लिए चुने जाने वाले स्थान का महत्व और बढ़ जाता है।

कर्नाटक सरकार की योजना सफल होती है, तो राज्य में बाघ के बच्चों के पुनर्वास के लिए एक विशेष व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।

हालांकि, अभी परियोजना को लेकर सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त स्थान का चयन है। भद्रा टाइगर रिजर्व में विरोध के बाद विभाग को अपनी शुरुआती योजना रोकनी पड़ी है।

अब बांदीपुर और नागरहोल में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, लेकिन वहां भी बाघों की मौजूदा संख्या को देखते हुए स्थान चयन आसान नहीं होगा।

परियोजना के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता होगी, विशेष बाड़े का आकार क्या होगा और केंद्र की स्थापना पर कितना खर्च आएगा, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी में कोई विवरण नहीं दिया गया है।

इसके अलावा केंद्र में एक समय में कितने बाघ के बच्चों को रखा जा सकेगा, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है।

फिलहाल कर्नाटक के पहले रीवाइल्डिंग सेंटर की स्थापना को लेकर वन विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

भद्रा टाइगर रिजर्व में स्थानीय समुदायों और पर्यावरणविदों के विरोध के कारण परियोजना का काम पूरी तरह रोक दिया गया है।

वन विभाग अब बांदीपुर और नागरहोल टाइगर रिजर्व में उपयुक्त स्थान तलाश रहा है। हालांकि, इन दोनों क्षेत्रों में बाघों की बड़ी संख्या होने से विभाग के सामने कठिनाई बनी हुई है।

कर्नाटक सरकार मध्य प्रदेश के रीवाइल्डिंग सेंटर मॉडल को अपनाकर बचाए गए बाघ के बच्चों को जंगल में लौटने के लिए तैयार करना चाहती है। अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भविष्य वैकल्पिक स्थान के चयन और वहां उपयुक्त व्यवस्था विकसित करने पर निर्भर करेगा।

Tags: