बेंगलुरु: सिलिकॉन सिटी में बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद के बीच रोड ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट (RTO) ने एक बार फिर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। नियमों का उल्लंघन कर चल रही बाइक टैक्सियों के खिलाफ अभियान चलाते हुए अधिकारियों ने 263 बाइक टैक्सियों को जब्त किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार ने बाइक टैक्सी सेवा को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बेंगलुरु की सड़कों पर चल रही कई बाइक टैक्सी सेवाएं आवश्यक कमर्शियल ट्रांसपोर्ट लाइसेंस के बिना संचालित की जा रही थीं। इसी आधार पर RTO ने अभियान चलाकर ऐसी बाइक टैक्सियों को निशाना बनाया और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त किया।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में बाइक टैक्सी सेवा पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसे चलाने के लिए निर्धारित नियमों और जरूरी परमिट का पालन करना अनिवार्य है। बिना व्यावसायिक परिवहन लाइसेंस के यात्रियों को किराए पर ले जाना मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

यह कार्रवाई कई महीनों की शांति के बाद दोबारा शुरू हुई है। बताया जा रहा है कि कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के बाद पिछले सात महीनों से RTO अधिकारियों ने बाइक टैक्सी के खिलाफ कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया था। अब राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल किए जाने के बाद परिवहन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है।

दरअसल, बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर राज्य में लंबे समय से बहस चल रही है। एक ओर जहां बाइक टैक्सी संचालक इसे सस्ता और सुविधाजनक परिवहन विकल्प बताते हैं, वहीं दूसरी ओर परिवहन विभाग और कुछ अन्य पक्ष इसके संचालन को लेकर नियमों और सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं।

बाइक टैक्सी सेवा का उपयोग खासकर बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में बढ़ा है, जहां ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक परिवहन की सीमाओं के कारण लोग कम समय और कम लागत वाले विकल्पों की तलाश करते हैं। कई यात्रियों के लिए बाइक टैक्सी अंतिम मील कनेक्टिविटी का आसान माध्यम बन गई है।

हालांकि, ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के कुछ संगठनों ने बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर आपत्तियां भी जताई हैं। उनका कहना है कि बिना उचित लाइसेंस और नियमों के संचालन से पारंपरिक परिवहन सेवाओं पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा और वाहन चालकों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए जाते हैं।

परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी सेवा को रोकना नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी व्यावसायिक परिवहन सेवाओं के लिए समान नियम लागू होने चाहिए ताकि यात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्था बनी रहे।

RTO का विशेष अभियान एक सप्ताह तक जारी रहने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि अभियान पूरा होने के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी और जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि नियमों का उल्लंघन जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में और सख्ती की जा सकती है।

इस पूरे मामले पर अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर भी नजर रहेगी। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बाइक टैक्सी सेवाओं को अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से इस सेवा के भविष्य को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

बेंगलुरु में बाइक टैक्सी का मुद्दा केवल परिवहन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार, यात्री सुविधा, सड़क सुरक्षा और नियमन से जुड़े कई पहलुओं को भी प्रभावित करता है। बड़ी संख्या में लोग बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़े हुए हैं, जबकि लाखों यात्री इसका उपयोग करते हैं।

कुल मिलाकर, RTO की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर बाइक टैक्सी सेवा को लेकर चल रही बहस को तेज कर दिया है। जहां सरकार नियमों के पालन को प्राथमिकता दे रही है, वहीं सेवा प्रदाता और उपयोगकर्ता इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति का इंतजार कर रहे हैं।

Tags: