गुरुग्राम जैसा हाल न हो SC की बेंगलुरु को दो टूक ग्रेटर नोएडा से सीखने की नसीहत
बेंगलुरु को SC की दो टूक गुरुग्राम से बचें ग्रेटर नोएडा से सीखें
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु में बढ़ते शहरीकरण, बुनियादी ढांचे और नियोजन को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों को भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना होगा। कोर्ट ने बेंगलुरु को गुरुग्राम जैसी समस्याओं से बचने और ग्रेटर नोएडा जैसे नियोजित विकास मॉडल से सीख लेने की नसीहत दी है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शहरी विकास में बेहतर प्लानिंग की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि अगर शहरों का विस्तार बिना उचित योजना के होता है तो आने वाले समय में यातायात, जल निकासी, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।
गुरुग्राम मॉडल की चुनौतियों का जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम का उदाहरण देते हुए कहा कि तेज रफ्तार से हुए विकास के बावजूद वहां कई इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर समस्याएं सामने आई हैं। बारिश के दौरान जलभराव, ट्रैफिक जाम और इंफ्रास्ट्रक्चर दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अदालत ने संकेत दिया कि किसी भी बड़े शहर के विकास में सिर्फ निर्माण गतिविधियां बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क, परिवहन, जल प्रबंधन और अन्य सुविधाओं की पहले से योजना बनाना जरूरी है।
ग्रेटर नोएडा की योजना का उदाहरण
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के नियोजित विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि शहरों के विस्तार में बेहतर मास्टर प्लान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। योजनाबद्ध तरीके से विकसित किए गए क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं का प्रबंधन अपेक्षाकृत आसान होता है।
बेंगलुरु के लिए चेतावनी
आईटी हब के रूप में पहचान रखने वाले बेंगलुरु में पिछले कुछ वर्षों में आबादी और निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है। इसके कारण यातायात दबाव, जल संकट और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते बोझ जैसी चुनौतियां सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश के कई बड़े शहर तेजी से शहरी विस्तार का सामना कर रहे हैं। अदालत ने साफ किया कि विकास के साथ-साथ टिकाऊ योजना और बेहतर प्रबंधन भी जरूरी है, ताकि भविष्य में नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।