सरकार बदलने के बाद वन विभाग में हलचल

Update: 2026-07-25 09:59 GMT

तिरुवनंतपुरम : सरकार बदलने के बाद वन विभाग में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में विजिलेंस जांच का सामना कर चुके कुछ वन रक्षक और अन्य कर्मचारी अब अपनी पुरानी तैनाती वाली जगहों पर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें वे कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्हें कथित वित्तीय गड़बड़ियों के बाद जिले से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार, कुछ वन कर्मी अब प्रशासनिक बदलावों का लाभ उठाकर अपनी पुरानी पोस्टिंग हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं। इनमें पेरियार टाइगर रिजर्व (PTR) जैसे महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में दोबारा तैनाती पाने की कोशिश करने वाले कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

पेरियार टाइगर रिजर्व समेत राज्य के प्रमुख वन क्षेत्रों में हर साल विभिन्न संरक्षण कार्यों, विकास योजनाओं और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर वन विभाग में विशेष सतर्कता बरती जाती है।

विजिलेंस जांच में सामने आई थीं अनियमितताएं

जानकारी के अनुसार, कुछ वन कर्मियों के खिलाफ विजिलेंस जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच के दौरान लाखों रुपये की कथित गड़बड़ी मिलने के बाद इन कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की गई थी।

कार्रवाई के तहत कुछ कर्मियों का तबादला जिले से बाहर कर दिया गया था, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखा जा सके। उस समय विभाग ने यह कदम पारदर्शिता बनाए रखने और जिम्मेदारी तय करने के उद्देश्य से उठाया था।

हालांकि, अब सरकार बदलने के बाद कुछ कर्मचारी अपनी पुरानी तैनाती वाली जगहों पर वापसी की कोशिश कर रहे हैं। इसे लेकर विभाग के भीतर भी चर्चा शुरू हो गई है।

पेरियार टाइगर रिजर्व में तैनाती को लेकर चर्चा

पेरियार टाइगर रिजर्व राज्य के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में से एक है। यहां वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, पर्यटन प्रबंधन और विभिन्न विकास कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में सरकारी धन खर्च किया जाता है।

ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े पदों पर तैनाती के दौरान ईमानदारी और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाती है।

विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी की दोबारा तैनाती से पहले उसके खिलाफ चल रही जांच, विभागीय कार्रवाई और रिकॉर्ड की समीक्षा जरूरी है।

तबादलों और पोस्टिंग को लेकर उठे सवाल

वन विभाग में तबादले और पोस्टिंग हमेशा से संवेदनशील मुद्दे रहे हैं। खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां बड़ी मात्रा में सरकारी बजट से जुड़े काम होते हैं, वहां कर्मचारियों की तैनाती को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।

वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई झेल चुके कर्मचारियों की वापसी की कोशिशों ने विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। कुछ अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल प्रशासनिक बदलावों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि संबंधित कर्मचारियों के पिछले रिकॉर्ड और जांच की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

करोड़ों के बजट वाले वन क्षेत्रों में पारदर्शिता जरूरी

पेरियार टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें वन संरक्षण, बुनियादी सुविधाओं का विकास, वन्यजीव सुरक्षा, गश्ती व्यवस्था और स्थानीय समुदायों से जुड़े कार्यक्रम शामिल होते हैं।

इतने बड़े बजट वाले विभागों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी मानी जाती है। किसी भी स्तर पर अनियमितता होने से न केवल सरकारी धन का नुकसान होता है, बल्कि संरक्षण कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वन विभाग में तैनाती करते समय कर्मचारियों की कार्यक्षमता के साथ-साथ उनके प्रशासनिक और वित्तीय रिकॉर्ड को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

विभाग में बढ़ी निगरानी की जरूरत

वन विभाग से जुड़े मामलों में समय-समय पर वित्तीय प्रबंधन और निगरानी को मजबूत करने की मांग उठती रही है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार या वित्तीय गड़बड़ी को रोकने के लिए नियमित ऑडिट और प्रभावी निगरानी व्यवस्था आवश्यक है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों की तैनाती और स्थानांतरण से जुड़े फैसले नियमों के अनुसार ही लिए जाएंगे। किसी भी कर्मचारी को महत्वपूर्ण पद या संवेदनशील क्षेत्र में भेजने से पहले सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल वन विभाग में इन कर्मचारियों की वापसी की कोशिशों को लेकर चर्चा जारी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विभाग प्रशासनिक अनुभव, नियमों और जांच रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए क्या निर्णय लेते हैं।

पेरियार टाइगर रिजर्व और अन्य महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में पारदर्शी प्रशासन बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

वन विभाग में चल रही यह हलचल एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि सरकारी धन से जुड़े विभागों में जवाबदेही, निगरानी और पारदर्शिता कितनी महत्वपूर्ण है।

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