कोट्टिक्कल/कोक्कयार। लगातार दो बार आई बाढ़ ने कोट्टिक्कल और कोक्कयार ग्राम पंचायतों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दोनों पंचायतों को जोड़ने वाला चप्पथ पुल अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। पुल के दोनों सिरों को सहारा देने वाले एबटमेंट के क्षतिग्रस्त होने और बह जाने के बाद स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि दोबारा तेज बारिश या अचानक बाढ़ आती है तो पुल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इससे बड़ी आबादी का संपर्क प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक वर्ष 2021 में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों से बहकर आए मलबे और बड़े-बड़े पेड़ चप्पथ पुल पर आकर जमा हो गए थे। तेज बहाव के कारण पुल की रेलिंग भी पूरी तरह बह गई थी। इसके बाद हाल ही में आई अचानक बाढ़ ने एक बार फिर पुल की स्थिति को कमजोर कर दिया। अब पुल के एबटमेंट भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल है।

बाढ़ के मलबे ने बढ़ाई परेशानी

2021 की बाढ़ के दौरान चप्पथ पुल को भारी नुकसान पहुंचा था। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा और पेड़ लेकर आया था। पानी के तेज बहाव में ये पेड़ और मलबा पुल से टकराए, जिससे पुल की संरचना पर दबाव पड़ा। पुल की सुरक्षा के लिए लगी रेलिंग भी बह गई थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी बाढ़ से हुए नुकसान के बाद पुल को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए स्थायी उपायों की जरूरत थी। हालांकि, हालिया अचानक आई बाढ़ ने समस्या को फिर गंभीर कर दिया। तेज जलप्रवाह के कारण पुल के दोनों ओर बने एबटमेंट कमजोर होकर ढह गए और उनका एक हिस्सा पानी के साथ बह गया।

3.5 लाख रुपये के एबटमेंट भी बहे

चप्पथ पुल के एबटमेंट के निर्माण पर करीब 3.5 लाख रुपये खर्च किए गए थे। ये संरचनाएं पुल के सिरों को मजबूती देने और उसे स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके ढहने और बह जाने के बाद पुल की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों को डर है कि यदि एबटमेंट के कमजोर होने का तत्काल समाधान नहीं किया गया और दोबारा तेज बारिश के कारण बाढ़ आई, तो पुल का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो सकता है। ऐसी स्थिति में पुल के पूरी तरह बंद होने की आशंका है। इससे क्षेत्र के कई वार्डों के लोगों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट सकता है।

कई वार्डों के लिए यही एकमात्र रास्ता

चप्पथ पुल केवल दो पंचायतों को जोड़ने वाला सामान्य मार्ग नहीं है, बल्कि आसपास के कई इलाकों के लोगों के लिए कोट्टायम जिले तक पहुंचने का महत्वपूर्ण और एकमात्र रास्ता है। वेम्बली, कुटिपलांगड, कोक्कयार, पुलिकाथडम, पूवांची और नरकम्पूझा वार्ड के लोग इस पुल के जरिए आवागमन करते हैं।

इन क्षेत्रों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, रोजगार, कारोबार, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी कामों के लिए कोट्टायम जिले की ओर जाते हैं। पुल के क्षतिग्रस्त होने या यातायात के लिए असुरक्षित घोषित किए जाने की स्थिति में इन लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है।

सैकड़ों छात्रों की आवाजाही भी प्रभावित

चप्पथ पुल से होकर रोजाना सैकड़ों छात्र भी आवागमन करते हैं। आसपास के इलाकों के विद्यार्थी स्कूल और कॉलेज जाने के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। पुल की स्थिति खराब होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है।

यदि पुल को अचानक बंद करना पड़ा तो छात्रों को वैकल्पिक मार्गों से लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में वैकल्पिक रास्ते भी मौसम की मार से प्रभावित होने की आशंका रहती है।

बड़ी आपदा की आशंका

स्थानीय लोगों को सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि पुल के एबटमेंट के कमजोर होने के कारण अगली बाढ़ में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। अचानक आने वाली बाढ़ के दौरान पानी का बहाव बेहद तेज हो जाता है। ऐसे में पुल के आसपास जमा मलबा और पेड़ इसकी संरचना पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।

निवासियों का कहना है कि 2021 की बाढ़ और हाल की अचानक आई बाढ़ से मिले अनुभव के बाद प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। उनका कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय पुल की संरचना और एबटमेंट की तकनीकी जांच कराकर स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।

तत्काल मरम्मत की मांग

स्थानीय लोग संबंधित विभाग और पंचायत प्रशासन से चप्पथ पुल का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुल की मौजूदा स्थिति का विशेषज्ञों से आकलन कराया जाए और जहां भी संरचनात्मक कमजोरी है, उसे जल्द दूर किया जाए।

बारिश और बाढ़ की आशंका वाले मौसम में पुल की सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो अगली बाढ़ में पुल को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ लोगों की आवाजाही भी पूरी तरह बाधित हो सकती है।

चप्पथ पुल की मौजूदा स्थिति ने कोट्टिक्कल और कोक्कयार पंचायतों के लोगों को चिंता में डाल दिया है। दो बाढ़ों के बाद पुल के एबटमेंट का ढहना खतरे की गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। समय रहते पुल की मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं या नहीं, यह आने वाले दिनों में क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए अहम सवाल बना हुआ है।

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