Thiruvananthapuram तिरुवनंतपुरम। केरल के सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय फसल उत्सव 'ओणम' में अब एक महीने से भी कम समय बचा है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की सरकार ने अगस्त के अंतिम सप्ताह में संपन्न होने वाले इस पर्व के दौरान आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति और किफायती कीमतें सुनिश्चित करने के लिए व्यापक बाजार हस्तक्षेप योजना की घोषणा की है। खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री अनूप जैकब ने सोमवार को घोषणा की कि सरकार का सालाना ओणम बाजार हस्तक्षेप कार्यक्रम 8 अगस्त को सप्लाईको के ओणम ट्रेड फेयर के साथ शुरू होगा। मुख्यमंत्री सतीशन एर्नाकुलम में राज्य-स्तरीय मेले का उद्घाटन करेंगे।
तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और कोझिकोड में तीन बड़े ट्रेड फेयर आयोजित किए जाएंगे, जबकि बाकी 11 जिलों में 16 से 25 अगस्त के बीच जिलास्तरीय मेले आयोजित किए जाएंगे। सभी 126 विधानसभा क्षेत्रों में ओणम बाजार खोले जाएंगे और तिरुवोणम से पहले के आखिरी छह दिनों में विशेष मेले आयोजित करने की योजना है। मेलों के साथ-साथ हॉर्टिकॉर्प के आउटलेट भी काम करेंगे, जो त्योहार के दौरान कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को रोकने में मदद के लिए सब्सिडी वाली दरों पर सब्जियां उपलब्ध कराएंगे।
त्योहार के मौसम में मांग बढ़ने को देखते हुए सरकार विभिन्न वितरण चैनलों के माध्यम से 1.29 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा चावल और 24,500 मीट्रिक टन गेहूं जारी करने की योजना बना रही है। नीले राशन कार्ड धारकों को अतिरिक्त तीन किलो चावल और दो किलो गेहूं मिलेगा, जबकि एनपीएस और एनपीएनएस लाभार्थियों सहित अन्य सभी राशन कार्ड श्रेणियों को भी गेहूं की आपूर्ति की जाएगी। लाभार्थियों को अगस्त के दौरान सब्सिडी वाली वस्तुओं का अपना सितंबर का कोटा पहले से खरीदने की भी अनुमति होगी। सरकार अगस्त के पहले सप्ताह में अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) परिवारों को अपनी लोकप्रिय मुफ्त ओणम किट (जिसमें 16 जरूरी खाद्य सामग्री होंगी) बांटना शुरू करेगी।
इस योजना के लिए लगभग 53 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, जिसमें कल्याणकारी संस्थानों में रहने वाले लोग भी शामिल हैं। त्योहार के मौसम में जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए, जिला कलेक्टरों के अधीन विशेष टीमें पूरे राज्य में सघन निरीक्षण करेंगी, जबकि मूल्य निगरानी सेल खुदरा कीमतों पर कड़ी नजर रखेगा। सरकार ने ओणम किट वितरण, बाजार हस्तक्षेप और धान की खरीद के लिए पिछले दो महीनों में पहले ही 448.05 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए हैं। इससे यह सुनिश्चित करने की उसकी कोशिश का पता चलता है कि बढ़ती कीमतों के बीच केरल का सबसे बड़ा त्योहार परिवारों के लिए किफायती बना रहे।