कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने मिल्मा तिरुवनंतपुरम क्षेत्रीय संघ को भंग करने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार संघ को भंग करते समय अनिवार्य प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रही है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने प्रशासनिक नियम को हटाकर पूर्व शासी निकाय को तत्काल बहाल करने का भी आदेश दिया। यह निर्देश शासी निकाय के सदस्यों द्वारा दायर एक अपील पर आया था।
हालाँकि एकल पीठ ने पहले एक याचिका में सरकार के आदेश को बरकरार रखा था, लेकिन खंडपीठ ने इसके खिलाफ दायर अपील पर नया फैसला सुनाया। अदालत के आदेश में कहा गया है कि निर्वाचित शासी निकाय को उचित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना बाहर कर दिया गया। इस तरह के विघटन की अनुमति केवल परामर्श करने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद ही दी जाती है। अदालत ने बताया कि सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रक्रियात्मक कदम नहीं उठाया गया।
सरकार ने अभिलेखों में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए शासी निकाय को भंग कर दिया था। हालांकि, हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इसे स्वीकार नहीं किया. अदालत के फैसले ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार शासी निकाय के सदस्यों को सुनने और उचित प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद एक नया आदेश जारी कर सकती है। राज्य सरकार ने सबरीमाला को आपूर्ति किए गए घी में अनियमितताओं का हवाला देते हुए एलडीएफ-सत्तारूढ़ मिल्मा तिरुवनंतपुरम संघ को भंग कर दिया था।