त्रिशूर। केरल के प्रसिद्ध त्रिशूर पूरम उत्सव में वर्ष 2024 के दौरान हुए व्यवधान का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उत्सव के प्रमुख आयोजकों में शामिल तिरुवमबाडी देवस्वोम ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को मामले की नई और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। देवस्वोम के सचिव के. गिरीश कुमार ने आरोप लगाया कि संगठन को जानबूझकर विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवस्वोम कभी भी त्रिशूर पूरम की परंपरा, भव्यता या धार्मिक महत्व को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करेगा। उनका कहना है कि इस मामले की वास्तविक सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब अपराध शाखा की जांच रिपोर्ट में देवस्वोम के कुछ पदाधिकारियों पर उत्सव में व्यवधान पैदा करने के आरोप लगाए गए हैं।

तिरुवमबाडी देवस्वोम ने उठाए जांच पर सवाल

गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए तिरुवमबाडी देवस्वोम के सचिव के. गिरीश कुमार ने जांच के निष्कर्षों पर असहमति जताई।

उन्होंने कहा कि त्रिशूर पूरम के आयोजन में देवस्वोम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में संगठन की ओर से उत्सव को बाधित करने का कोई उद्देश्य नहीं हो सकता।

गिरीश कुमार ने आरोप लगाया कि देवस्वोम को विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।

देवस्वोम का कहना है कि केवल एक पक्ष को दोषी ठहराने के बजाय उत्सव के दौरान हुई घटनाओं की व्यापक समीक्षा आवश्यक है।

अपराध शाखा की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

त्रिशूर पूरम में व्यवधान के मामले की जांच केरल पुलिस की अपराध शाखा ने की है।

21 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, अपराध शाखा की रिपोर्ट राज्य पुलिस प्रमुख के माध्यम से सरकार तक पहुंचाई गई है।

रिपोर्ट में तिरुवमबाडी देवस्वोम के प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामले में आठ व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इनमें देवस्वोम से जुड़े कुछ पदाधिकारी भी शामिल हैं।

जांच में दंगा भड़काने का प्रयास करने और विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं। संबंधित व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही तय होगी।

दो साल पुराना है त्रिशूर पूरम विवाद

यह मामला अप्रैल 2024 में आयोजित त्रिशूर पूरम उत्सव से जुड़ा हुआ है।

उस समय उत्सव के दौरान पुलिस व्यवस्था और आयोजकों के बीच कुछ मुद्दों को लेकर विवाद पैदा हुआ था।

विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और जुलूसों की आवाजाही प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई थीं।

उत्सव के दौरान आतिशबाजी कार्यक्रम में भी देरी हुई थी, जिसके बाद आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे थे।

इस घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने जांच की मांग की थी।

मामला धीरे-धीरे राजनीतिक विवाद में बदल गया और राज्य सरकार ने इसकी जांच कराने का निर्णय लिया।

देवस्वोम ने पहले पुलिस पर लगाए थे आरोप

तिरुवमबाडी देवस्वोम ने नवंबर 2024 में केरल उच्च न्यायालय के सामने अपना पक्ष रखते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

देवस्वोम की ओर से दावा किया गया था कि उत्सव में शामिल होने आए श्रद्धालुओं को कुछ मार्गों पर आगे बढ़ने से रोका गया।

संगठन ने आरोप लगाया था कि पुलिस की अनावश्यक पाबंदियों के कारण पारंपरिक जुलूस प्रभावित हुए।

देवस्वोम ने यह भी दावा किया था कि आतिशबाजी की तैयारियों में शामिल अधिकृत कर्मचारियों को कुछ स्थानों तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ा।

हालांकि, ये देवस्वोम की ओर से लगाए गए आरोप थे और पुलिस की जिम्मेदारी को लेकर पक्षों के बीच मतभेद बने रहे।

जांच रिपोर्ट में पुलिस को राहत

हालिया अपराध शाखा की जांच रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों को उत्सव में कथित व्यवधान पैदा करने के आरोपों से राहत मिलने की जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया।

इसके विपरीत, जांच में देवस्वोम के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्सव से पहले आयोजित समीक्षा बैठकों में लिए गए कुछ निर्णयों का पालन नहीं होने से विवाद पैदा हुआ था।

पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एम.आर. अजित कुमार की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट में प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

राजनीतिक विवाद का केंद्र बना था उत्सव

त्रिशूर पूरम में हुए व्यवधान के बाद केरल की राजनीति में भी विवाद तेज हो गया था।

विभिन्न राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर इस घटना का राजनीतिक लाभ उठाने के आरोप लगाए थे।

कुछ नेताओं ने दावा किया था कि उत्सव में व्यवधान का संबंध वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों से हो सकता है।

हालांकि, राजनीतिक आरोपों और जांच में सामने आए निष्कर्षों के बीच अंतर करना आवश्यक है।

किसी राजनीतिक साजिश के आरोप की पुष्टि तभी मानी जा सकती है, जब संबंधित साक्ष्यों की उचित जांच हो और कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्कर्ष सामने आएं।

क्या है प्रसिद्ध त्रिशूर पूरम उत्सव?

त्रिशूर पूरम केरल के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल है।

यह उत्सव त्रिशूर के वडक्कुनाथन मंदिर के आसपास आयोजित होता है।

इसमें सजे हुए हाथियों की शोभायात्रा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां, रंग-बिरंगे छत्रों का प्रदर्शन और विशेष आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र होते हैं।

तिरुवमबाडी और परमेक्कावु देवस्वोम इस आयोजन के दो प्रमुख भागीदार हैं।

उत्सव को देखने के लिए केरल के विभिन्न जिलों के अलावा देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

इसी कारण इसके आयोजन में आने वाली बाधाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से गंभीर माना जाता है।

देवस्वोम ने धार्मिक परंपराओं का दिया हवाला

तिरुवमबाडी देवस्वोम का कहना है कि उसकी प्राथमिकता हमेशा त्रिशूर पूरम की धार्मिक परंपराओं का संरक्षण करना रही है।

संगठन के अनुसार, वर्षों से उत्सव को भव्य तरीके से आयोजित करने के लिए व्यापक तैयारियां की जाती हैं।

इसके लिए विभिन्न प्रशासनिक विभागों, पुलिस अधिकारियों और धार्मिक समितियों के साथ समन्वय की आवश्यकता होती है।

देवस्वोम का तर्क है कि ऐसी स्थिति में आयोजक स्वयं उत्सव को बाधित करने का प्रयास क्यों करेंगे।

इसी आधार पर संगठन ने जांच के निष्कर्षों को चुनौती देते हुए मामले की दोबारा जांच कराने की मांग उठाई है।

सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर

अपराध शाखा की रिपोर्ट राज्य सरकार तक पहुंचने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ आरोपों के तहत अभियोजन आगे बढ़ाने के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक है।

अनुमति मिलने के बाद संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

दूसरी ओर, तिरुवमबाडी देवस्वोम ने नई और निष्पक्ष जांच की मांग करके मौजूदा रिपोर्ट पर असहमति दर्ज कराई है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केरल सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।

निष्पक्ष जांच की मांग से फिर गरमाया मामला

त्रिशूर पूरम विवाद लगभग दो साल बाद भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

एक ओर अपराध शाखा की रिपोर्ट में देवस्वोम के कुछ पदाधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर संगठन इन आरोपों को खारिज कर रहा है।

देवस्वोम सचिव के. गिरीश कुमार ने कहा है कि सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।

फिलहाल जांच रिपोर्ट को लेकर विवाद जारी है। मामले में आगे सरकार और संबंधित कानूनी संस्थाओं की कार्रवाई से स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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