तिरुवनंतपुरम: जिस दिन आबकारी आयुक्त (एक्साइज कमिश्नर) सीरम सांबाशिवा राव को उनके पद से हटाया गया, उसी दिन उन्होंने कथित रिश्वतखोरी के मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की। उन्होंने विभाग पर यह आरोप भी लगाया कि तबादलों से जुड़े फैसलों में उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।
शुक्रवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव (कर) को सौंपी गई एक रिपोर्ट में, राव ने बताया कि 4 नवंबर को उनकी जानकारी के बिना 32 आबकारी और सर्कल निरीक्षकों का तबादला कर दिया गया। विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि ये तबादला सूचियां सर्विस एसोसिएशन और आबकारी मंत्री के कार्यालय से सलाह-मशविरा करने के बाद तैयार की गई थीं।
राव ने संयुक्त आबकारी आयुक्त एस. विनोद और अलाप्पुझा के उप आबकारी आयुक्त अजय का नाम लेते हुए, 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) के तहत जांच की मांग की। उन्होंने यह भी सिफारिश की कि इन दोनों अधिकारियों को फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया जाए।
रिपोर्ट में एक मुखबिर के हवाले से बताया गया है कि विनोद ने मुवाट्टुपुझा स्थित 'गंगा बार' से, बार के समय और लाइसेंस की अवधि बढ़ाने की मंजूरी देने के बदले कथित तौर पर 50,000 रुपये लिए। मुखबिर ने यह भी आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान अजय ने कायमकुलम स्थित 'रोमा सेंटर बार' के मालिक से 30,000 रुपये वसूले। रिपोर्ट के अनुसार, बार का मालिक आबकारी मंत्री का परिचित था।
राव की रिपोर्ट में आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि अजय ने 'टॉडी शॉप' (ताड़ी की दुकान) के लाइसेंस के लिए 1 लाख रुपये लिए थे और उसके पास 'बेनामी' संपत्ति भी है।