एडाथानाट्टुकारा। चिराट्टाकुलम मरट्टुकावु भद्रकाली मंदिर संरक्षण समिति ने सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए मंदिर परिसर में जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियां स्कूल के लंच प्रोग्राम के लिए दान की हैं। समिति की ओर से ये ताजी और जैविक सब्जियां एडाथानाट्टुकारा टी.ए.एम. यू.पी. स्कूल के विद्यार्थियों के दोपहर के भोजन कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराई गईं। इस पहल से जहां विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, वहीं जैविक खेती और सामुदायिक सहयोग का संदेश भी मजबूत हुआ है।
मंदिर परिसर में खाली पड़ी भूमि का उपयोग सब्जियों की खेती के लिए किया गया। यहां बिना रासायनिक खाद और हानिकारक कीटनाशकों के जैविक तरीके से सब्जियां उगाई गईं। फसल तैयार होने के बाद इसे बाजार में बेचने के बजाय स्कूल के भोजन कार्यक्रम के लिए दान करने का निर्णय लिया गया। संरक्षण समिति की इस पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है।
स्कूल के भोजन कार्यक्रम के लिए मिली सब्जियां
समिति ने मंदिर परिसर में तैयार की गई सब्जियों को एडाथानाट्टुकारा टी.ए.एम. यू.पी. स्कूल को सौंपा। स्कूल में विद्यार्थियों के दोपहर के भोजन की व्यवस्था के लिए इन सब्जियों का इस्तेमाल किया जाएगा। ताजी सब्जियों के उपयोग से बच्चों को पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
स्कूल के लंच प्रोग्राम से जुड़े सदस्यों ने मंदिर संरक्षण समिति की इस पहल के लिए आभार जताया। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली ऐसी सहायता से स्कूल के भोजन कार्यक्रम को मजबूती मिलती है और बच्चों को बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
मंदिर परिसर में जैविक खेती की पहल
मंदिर परिसर में जैविक सब्जियों की खेती की पहल केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इससे खाली भूमि के उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने का संदेश भी मिलता है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बजाय जैविक तरीके अपनाकर तैयार की गई सब्जियां स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
समिति की ओर से परिसर में खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना भी है। खेती से तैयार उपज को जरूरतमंद या सार्वजनिक संस्थानों के साथ साझा करने से सामुदायिक भागीदारी की भावना मजबूत होती है।
सब्जियां लेने के लिए जुटे समिति और स्कूल के सदस्य
सब्जियां स्कूल को सौंपे जाने के अवसर पर मंदिर संरक्षण समिति के प्रभारी पी. जयशंकरन और पी. वासुदेवन मौजूद रहे। मंदिर के सुपरिटेंडेंट रमेश एम्ब्रान्थिरी ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
स्कूल की ओर से लंच समिति के प्रभारी के.टी. जाफिर और के. जसीरा सब्जियां लेने के लिए पहुंचे। इस अवसर पर शिक्षक के. जुनैद, वी.पी. सनकुमार, पी.एम. फैज़ा और बीबी के साथ विद्यालय के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।
समिति और स्कूल के प्रतिनिधियों ने इस पहल को बच्चों के हित से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताया। विद्यार्थियों की मौजूदगी में सब्जियों का वितरण और हस्तांतरण किया गया। इस दौरान जैविक खेती, पौष्टिक भोजन और सामुदायिक सहयोग के महत्व पर भी चर्चा हुई।
बच्चों के पोषण पर जोर
स्कूल के भोजन कार्यक्रम में ताजी सब्जियों की उपलब्धता बच्चों के पोषण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों के लिए तैयार होने वाले भोजन में हरी और अन्य ताजी सब्जियों को शामिल करने से भोजन की गुणवत्ता बेहतर होती है। मंदिर समिति की ओर से उपलब्ध कराई गई जैविक सब्जियां स्कूल को स्थानीय स्तर पर ताजा सामग्री उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।
विद्यालय में पढ़ने वाले कई विद्यार्थियों के लिए स्कूल का दोपहर का भोजन दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में भोजन में पौष्टिक और ताजी सामग्री का इस्तेमाल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।
सामाजिक सहयोग की मिसाल
मंदिर संरक्षण समिति की इस पहल को धार्मिक संस्था और शैक्षणिक संस्थान के बीच सामाजिक सहयोग के उदाहरण के रूप में भी देखा जा रहा है। मंदिर परिसर में तैयार हुई उपज को विद्यार्थियों के भोजन के लिए दान करना समाज के विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे की मदद करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
स्थानीय स्तर पर ऐसी पहलें सामुदायिक भावना को मजबूत करने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का रास्ता भी दिखाती हैं। यदि अन्य संस्थाएं भी अपने परिसर में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सामाजिक जरूरतों के लिए करें तो शिक्षा और पोषण से जुड़े कार्यक्रमों को अतिरिक्त सहायता मिल सकती है।
चिराट्टाकुलम मरट्टुकावु भद्रकाली मंदिर संरक्षण समिति की ओर से शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में भी जारी रहने की उम्मीद है। मंदिर परिसर में जैविक तरीके से सब्जियों की खेती और उनकी उपज को स्कूल के भोजन कार्यक्रम में उपलब्ध कराने से बच्चों को ताजी खाद्य सामग्री मिलेगी। साथ ही इससे जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देने का संदेश भी जाएगा। स्थानीय लोगों और स्कूल समुदाय ने इस प्रयास को सकारात्मक पहल बताते हुए इसकी सराहना की है।