तिरुवनंतपुरम: केरल के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के अध्यक्ष और सदस्यों को परीक्षा और भर्ती अनियमितताओं में आरोपी के रूप में नामित करने वाली एफआईआर का विवरण सौंपा। उन्होंने पूर्व राज्यपाल आर वी आर्लेकर द्वारा उन्हें हटाने के लिए सौंपी गई सिफारिश पर आगे की कार्रवाई का भी अनुरोध किया।
इसके तुरंत बाद, तमिलनाडु के राज्यपाल आर वी आर्लेकर ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात की। उन्होंने पीएससी में भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं और उन परिस्थितियों के बारे में बताया जिसके कारण उन्हें इसके अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की सिफारिश करनी पड़ी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भी यही मांग उठाते हुए राष्ट्रपति से मुलाकात की।
संभावना है कि राष्ट्रपति गवर्नर की सिफारिश को अटॉर्नी जनरल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में भेज सकते हैं, जिसमें अध्यक्ष और सदस्यों के खिलाफ जांच की मांग की जाएगी। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी के संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरे से लौटने के तुरंत बाद यह कदम उठाए जाने की उम्मीद है। राज्यपाल माथुर ने राष्ट्रपति को मत्स्य विस्तार अधिकारी भर्ती घोटाले के संबंध में अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बारे में जानकारी दी, जिसमें पीएससी अध्यक्ष, सदस्यों और अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। उन्होंने राष्ट्रपति को यह भी बताया कि मामले में पीएससी के अतिरिक्त सचिव और एक सेवानिवृत्त उप सचिव को जेल भेजा गया है। राष्ट्रपति से मिलने से पहले, माथुर ने लोक भवन में कानूनी सलाहकार को बुलाया और मामले की जानकारी मांगी।
सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ करेगी जांच संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत, सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति के संदर्भ के आधार पर सीधी जांच करने के लिए पांच सदस्यीय पीठ का गठन करेगा। अध्यक्ष और सदस्यों को नोटिस जारी किए जाएंगे, और अदालत संबंधित दस्तावेज और पुलिस रिपोर्ट मांगेगी। एक बार जब सुप्रीम कोर्ट अपनी जांच शुरू कर देगा, तो राज्यपाल के पास अध्यक्ष और सदस्यों को निलंबित करने का अधिकार होगा। हालाँकि, उन्हें हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को उन्हें दोषी ठहराना होगा और राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट सौंपनी होगी।
सरकार निलंबन की अनुशंसा भी कर सकती है1. सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच शुरू होने पर राज्य सरकार यह भी सिफारिश कर सकती है कि राज्यपाल अध्यक्ष और सदस्यों को निलंबित कर दें। यदि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना निलंबन का आदेश देते हैं, तो पीएससी प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।2. अदालत ने पहले इसी आधार पर कर्नाटक पीएससी अध्यक्ष का निलंबन रद्द कर दिया था। युवा मोर्चा की शिकायत के बाद राज्यपाल द्वारा सौंपी गई अनुशंसा के आधार पर कार्रवाई करने पर सरकार राजनीतिक असर की संभावना पर भी विचार कर रही है।
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