केरल विधानसभा में जबरदस्त हंगामा अवैध बाड़ हटाने पर सरकार और विपक्ष आमने सामने
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में गुरुवार को इडुक्की जिले के वन-सीमावर्ती इलाकों में अवैध बाड़ और ढांचों को हटाने की कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। चिन्नाकानल और शांतपारा जैसे क्षेत्रों में वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया कि इसके पीछे रिहायशी और राजस्व भूमि को वन भूमि में बदलने का छिपा एजेंडा हो सकता है। वहीं, राज्य सरकार ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई जरूरी थी।विधानसभा में यह मुद्दा उस समय गरमा गया, जब विपक्ष की ओर से हाथी गलियारे वाले इलाकों में ढांचों को हटाने और विभिन्न पाबंदियां लागू करने के खिलाफ स्थगन प्रस्ताव पेश किया गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की कार्रवाई से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और स्थानीय निवासियों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
राजस्व भूमि से बाड़ हटाने पर उठे सवाल
विपक्ष ने दावा किया कि राजस्व भूमि पर लगाई गई बाड़ को हटाने की कार्रवाई सामान्य अतिक्रमण विरोधी अभियान तक सीमित नहीं है। आरोप लगाया गया कि इसके जरिए कार्डमम हिल रिजर्व (CHR) की जमीन को वन भूमि में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।विपक्षी सदस्यों ने कहा कि वन विभाग की कार्रवाई से स्थानीय किसानों में चिंता बढ़ रही है। उनके अनुसार, जिन इलाकों में लोग लंबे समय से खेती और निवास कर रहे हैं, वहां बाड़ हटाने और अन्य प्रतिबंध लगाने से उनकी आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।इस दौरान वन विभाग के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए गए। विपक्ष ने पूछा कि राजस्व भूमि पर मौजूद बाड़ हटाने के लिए वन विभाग को किस आधार पर अधिकार प्राप्त है।
विधायक के.यू. जेनिश कुमार ने लगाए आरोप
स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए विधायक के.यू. जेनिश कुमार ने कहा कि सरकारी आदेश का इस्तेमाल रिहायशी इलाकों से बाड़ हटाने के लिए किया जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के अधिकारों और आजीविका पर असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राजस्व भूमि पर लगी बाड़ को हटाने में वन विभाग की कानूनी भूमिका क्या है।विधानसभा में उठाए गए इन सवालों के बाद यह मुद्दा भूमि अधिकारों और वन संरक्षण के बीच संतुलन से जुड़ी बहस का केंद्र बन गया।
सरकार ने कहा- लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कार्रवाई
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए वन मंत्री शिबू बेबी जॉन और राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार ने सरकार का पक्ष रखा। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल अवैध और अनधिकृत बाड़ तथा ढांचों के खिलाफ की जा रही है।वन मंत्री ने बताया कि चिन्नाकानल क्षेत्र में इंसानों और जंगली हाथियों के बीच संघर्ष गंभीर समस्या बन चुका है। क्षेत्र में लगभग 30 हजार लोग और 18 हाथी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि हाथियों की आवाजाही बाधित होने से मानव जीवन के लिए खतरा बढ़ सकता है। सरकार का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध अतिक्रमण हटाना है।
विपक्ष ने किया विधानसभा से वॉकआउट
बहस के दौरान विपक्ष ने जिला कलेक्टर के आदेशों को वापस लेने की मांग की। विपक्षी विधायक ने आरोप लगाया कि इन आदेशों से स्थानीय निवासियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।वहीं, राजस्व मंत्री ने कहा कि अवैध ढांचों को हटाने की मांग स्थानीय स्तर पर भी उठाई गई थी। सरकार ने शाम के बाद आवाजाही संबंधी पाबंदियों को भी लोगों की सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया।सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने किसानों की चिंताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट किया।