तिरुवनंतपुरम: वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के.एस. हम्सा ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन के सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। हम्सा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि बोर्ड का पुनर्गठन निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किया गया।
उन्होंने तर्क दिया कि उम्मीद अधिनियम में वक्फ बोर्ड को भंग करने का कोई प्रावधान नहीं है और पुनर्गठन वक्फ अधिनियम की धारा 14 का अनुपालन किए बिना किया गया था। हम्सा ने यह भी बताया कि डिवीजन बेंच ने बोर्ड के पुनर्गठन का आदेश नहीं दिया था। उन्होंने कहा, डिवीजन बेंच ने सरकार को केवल बोर्ड में रिक्त पदों को भरने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया था। हालाँकि, सरकार इस दिशा से आगे बढ़ गई और पूरे बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया, हम्सा ने आरोप लगाया।
उन्होंने सरकार के इस तर्क को भी चुनौती दी कि पुनर्गठन में बोहरा समुदाय के एक सदस्य को शामिल करना आवश्यक था। हम्सा ने बताया कि वर्तमान में बोर्ड में एक विधायक का पद खाली है और बोहरा समुदाय के किसी सदस्य को उस पद पर नियुक्त किया जा सकता था।
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