इंदौर में सरकारी जमीन पर अवैध कॉलोनी बसाने की कोशिश नाकाम

Update: 2026-07-30 04:50 GMT

इंदौर। जिला प्रशासन ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए सिरपुर इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध कॉलोनी विकसित करने की कोशिश को नाकाम कर दिया। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन पर बनाए गए अवैध ढांचों को हटाया और इस मामले में कथित रूप से शामिल जमीन माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। कार्रवाई के दौरान करीब 40 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई सिरपुर गांव में की गई, जहां कुछ लोगों द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कर कॉलोनी बसाने की तैयारी की जा रही थी। सूचना मिलने के बाद राजस्व विभाग की टीम ने जमीन की जांच की और मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। जांच में सामने आया कि जिस जमीन पर निर्माण गतिविधियां चल रही थीं, वह निजी नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज भूमि है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मल्हारगंज के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और मल्हारगंज तहसीलदार ने सिरपुर गांव स्थित जमीन का निरीक्षण किया। राजस्व रिकॉर्ड की जांच में पाया गया कि संबंधित भूमि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के नाम पर दर्ज है। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा इस जमीन पर अवैध कब्जा करने और प्लॉट काटकर कॉलोनी विकसित करने का प्रयास किया जा रहा था।

जांच के बाद प्रशासन ने मौके पर मौजूद अवैध निर्माण और अन्य ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। टीम ने बुलडोजर की मदद से बनाए गए अस्थायी और अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि सरकारी जमीन को किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे से बचाने के लिए यह कार्रवाई की गई है।

प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर उसे निजी उपयोग में लाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जमीन माफिया द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा करने की कोशिशों को रोकने के लिए जिले में लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अवैध तरीके से बेचने की कोशिश करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

इस मामले में प्रशासन ने संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अधिकारियों के अनुसार, जमीन की खरीद-फरोख्त या कॉलोनी विकसित करने से पहले आवश्यक अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। बिना अनुमति सरकारी जमीन पर निर्माण करना कानून का उल्लंघन है।

शहर में बढ़ते शहरी विस्तार के बीच सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। कई बार जमीन माफिया सरकारी, नजूल या अन्य विभागों की जमीन पर अवैध तरीके से प्लॉटिंग करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन द्वारा जमीन की पहचान कर कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाती है।

राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जमीनों के रिकॉर्ड की नियमित जांच की जा रही है, ताकि सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सके। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और जहां भी अवैध गतिविधियों की जानकारी मिलती है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाती है।

सिरपुर इलाके में हुई इस कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने से सरकारी जमीन को अवैध कॉलोनी में बदलने की कोशिश विफल हो गई। यदि यह गतिविधि लंबे समय तक चलती रहती, तो सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बढ़ सकता था और भविष्य में उसे हटाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता था।

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे जमीन खरीदने से पहले उसके दस्तावेजों और स्वामित्व की जांच जरूर करें। अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने से लोगों को भविष्य में कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी जमीन के संबंध में संदेह होने पर राजस्व विभाग से जानकारी ली जा सकती है।

फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है। प्रशासन और पुलिस यह पता लगाने में जुटे हैं कि सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इससे पहले भी ऐसी कोई गतिविधि की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है।

सिरपुर में हुई इस कार्रवाई से प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए आने वाले समय में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

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