मध्य प्रदेश: राजधानी भोपाल में चल रहे किसान आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने किसानों की मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से संवाद के लिए चार मंत्रियों की समिति गठित की है। यह समिति किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा करेगी और उनकी मांगों पर सहमति बनाने का प्रयास करेगी। सरकार का कहना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाएगा।
भोपाल में विभिन्न मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसान ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने, खाद वितरण में लागू ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने और प्रतिदिन 10 घंटे लगातार बिजली आपूर्ति जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
किसानों से बातचीत की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने चार मंत्रियों को सौंपी है। इसमें कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और ओबीसी कल्याण मंत्री कृष्णा गौर शामिल हैं। यह मंत्री समिति किसान संगठनों से चर्चा कर उनकी मांगों को समझेगी और सरकार के स्तर पर समाधान निकालने का प्रयास करेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संवाद ही किसी भी समस्या का स्थायी समाधान निकालने का सबसे बेहतर माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के सकारात्मक सुझावों का हमेशा स्वागत करती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले भी कृषि मंत्री को किसानों से बातचीत के लिए भेजा गया था और आगे भी मंत्री एवं अधिकारी लगातार किसानों से चर्चा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के जरिए ही हर समस्या का समाधान संभव है। सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुन रही है और व्यावहारिक समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।
वहीं, किसान आंदोलन को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर किसानों की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि अगर प्रदेश में किसानों की स्थिति ठीक है तो इतनी बड़ी संख्या में किसान भोपाल आने को मजबूर क्यों हुए। उन्होंने सरकार से किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
कांग्रेस का कहना है कि किसानों को अपनी समस्याएं रखने का पूरा अधिकार है और शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं को हल करने के बजाय उन्हें राजनीतिक मुद्दा बना रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसानों की मांगों का सम्मानपूर्वक समाधान किया जाना चाहिए।
कांग्रेस के आरोपों पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के मुद्दे पर राजनीति करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार किसानों के हितों के लिए लगातार काम कर रही है और बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।
कृषि मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान टकराव से नहीं बल्कि संवाद से ही संभव है।
मंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह आंदोलन के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की हर उचित मांग पर विचार करेगी और बातचीत के माध्यम से रास्ता निकालने का प्रयास जारी रहेगा।
फिलहाल किसान आंदोलन के बीच सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। चार मंत्रियों की समिति किसानों की मांगों पर क्या प्रस्ताव रखती है और आंदोलन को लेकर आगे क्या निर्णय होता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार जारी है।