भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 साइबर कंसल्टेंट की नियुक्ति, साइबर हेल्पलाइन 1930 के लिए कॉल सेंटर और साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए मिटिगेशन सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, प्रदेश के हर जिले में साइबर थाना खोलने, प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क और डिजिटल फोरेंसिक लैब स्थापित करने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव अभी भी लंबित हैं। राज्य में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक साइबर ठग प्रदेशवासियों से करीब 634 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर चुके हैं। हाल ही में ग्वालियर में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से 21 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया था, जिसके बाद साइबर अपराधों को लेकर पुलिस और सरकार की चिंता बढ़ गई है।
27 साइबर कंसल्टेंट संभालेंगे तकनीकी जांच
मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद पुलिस विभाग में 27 साइबर कंसल्टेंट नियुक्त किए जाएंगे। ये विशेषज्ञ साइबर अपराधों की जांच में पुलिस की मदद करेंगे। ऑनलाइन फ्रॉड, डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े अपराध, डाटा विश्लेषण और तकनीकी जांच जैसे मामलों में इनकी भूमिका अहम होगी। साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता की कमी को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि साइबर विशेषज्ञों की मदद से जटिल मामलों को तेजी से सुलझाने में सहायता मिलेगी।
1930 हेल्पलाइन के लिए बनेगा कॉल सेंटर
साइबर ठगी की शिकायतों के लिए संचालित हेल्पलाइन नंबर 1930 को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए 60 सीटों वाला कॉल सेंटर स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य पीड़ितों की शिकायतों पर जल्द कार्रवाई करना और ठगी के शुरुआती समय में धनराशि रोकने के प्रयासों को तेज करना है। विशेषज्ञों के अनुसार साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर शिकायत मिलने से संदिग्ध खातों को फ्रीज करने और पैसे वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
मिटिगेशन सेंटर में बैंक प्रतिनिधि करेंगे मदद
सरकार ने साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई के लिए मिटिगेशन सेंटर बनाने का भी फैसला लिया है। इस सेंटर में बैंक प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, जो संदिग्ध बैंक खातों की पहचान कर उन्हें तुरंत रोकने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। इस व्यवस्था से पुलिस, बैंक और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा, जिससे साइबर ठगी के मामलों में कार्रवाई तेज हो सकेगी।
साइबर थाने और डिजिटल लैब के प्रस्ताव अटके
सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है, लेकिन प्रदेश के सभी जिलों में साइबर थाने खोलने और हर पुलिस थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनाने की योजना अभी पूरी नहीं हो पाई है। इसके अलावा डिजिटल फोरेंसिक लैब स्थापित करने का प्रस्ताव भी वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण लंबित है। पुलिस विभाग का मानना है कि साइबर अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और पर्याप्त संसाधनों की जरूरत है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
साइबर अपराध रोकना सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं। सरकार का लक्ष्य साइबर अपराधों की जांच व्यवस्था को मजबूत करना और आम लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने के लिए बेहतर तंत्र तैयार करना है।
हालांकि, बढ़ते साइबर अपराधों के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नई नियुक्तियों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि साइबर जागरूकता, तकनीकी प्रशिक्षण और मजबूत जांच ढांचे की भी जरूरत होगी।