Veerangana दुर्गावती टाइगर रिजर्व से घायल बाघिन का रेस्क्यू, इलाज के लिए जबलपुर भेजी गई
जबलपुर : मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से 15 से 18 महीने की एक घायल बाघिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है। बाघिन के पिछले पैर में चोट पाई गई और वह कई दिनों से भूखी भी थी। प्राथमिक जांच में उसका पेट लगभग खाली मिला। वन विभाग ने बाघिन को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद बेहतर इलाज के लिए गुरुवार को सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक, जबलपुर भेज दिया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी निगरानी और उपचार कर रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघिन की उम्र करीब 15 से 18 महीने आंकी गई है। शुरुआती जांच में उसके पैर में गंभीर चोट के संकेत मिले हैं, जिसके कारण उसके लिए सामान्य रूप से शिकार करना मुश्किल हो गया था। यही वजह मानी जा रही है कि वह कई दिनों तक पर्याप्त भोजन नहीं कर सकी और कमजोर हो गई।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 5 जुलाई को हुई थी। उस दिन टाइगर रिजर्व के मोहली सर्कल क्षेत्र में काम कर रहे एक मजदूर पर एक बड़ी बिल्ली प्रजाति के वन्यजीव ने हमला कर उसे घायल कर दिया था। घटना के समय मजदूर के साथ मौजूद महिला वनरक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) ने हमलावर जानवर के पंजों के निशानों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पंजों का आकार अपेक्षाकृत छोटा था, जिससे यह संभावना जताई गई कि हमला किसी युवा बाघ या बाघिन ने किया है।
घटना के बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। वनकर्मियों और विशेषज्ञों की टीम ने जंगल में लगातार निगरानी रखी, कैमरा ट्रैप और अन्य तकनीकी साधनों की मदद से वन्यजीव की तलाश की गई।
7 जुलाई को सर्च अभियान के दौरान लगभग 15 से 18 महीने की एक युवा बाघिन दिखाई दी। उसके व्यवहार और क्षेत्र में मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आशंका जताई गई कि मजदूर पर हमला करने वाली वही बाघिन हो सकती है। इसके बाद वन विभाग ने उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने और चिकित्सकीय जांच कराने का निर्णय लिया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान विशेषज्ञों ने सावधानीपूर्वक बाघिन को बेहोश कर सुरक्षित कब्जे में लिया। इसके बाद उसकी स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें उसके पैर में चोट की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने यह भी पाया कि उसका पेट लगभग खाली था, जिससे संकेत मिला कि वह लंबे समय से पर्याप्त भोजन नहीं कर पाई थी।
वन अधिकारियों का मानना है कि पैर में चोट लगने के कारण बाघिन की शिकार करने की क्षमता प्रभावित हुई होगी। जंगल में भोजन नहीं मिलने की स्थिति में वह कमजोर हो गई और संभवतः इसी कारण मानव बस्ती के निकट पहुंची, जहां मजदूर पर हमला हुआ। हालांकि वन विभाग ने अभी तक इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है और मामले की जांच जारी है।
बाघिन की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए जबलपुर स्थित सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक भेजा गया। यहां वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम उसकी विस्तृत चिकित्सकीय जांच कर रही है। उपचार के दौरान उसकी चोट, पोषण स्तर और समग्र स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाएगी।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यदि उपचार के बाद बाघिन पूरी तरह स्वस्थ हो जाती है और जंगल में स्वतंत्र रूप से रहने योग्य पाई जाती है, तो विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर उसे दोबारा प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सकता है। हालांकि यह निर्णय उसके स्वास्थ्य में सुधार और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि युवा बाघों और बाघिनों के लिए जंगल में अपना क्षेत्र स्थापित करना और शिकार करना चुनौतीपूर्ण होता है। यदि किसी कारण से उन्हें चोट लग जाए तो उनके लिए भोजन जुटाना और भी कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में वे कभी-कभी मानव आबादी के नजदीक पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आ सकती हैं।
वन विभाग ने आसपास के गांवों के लोगों से भी सतर्क रहने और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत विभाग को सूचना देने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि बिना प्रशिक्षण के किसी भी जंगली जानवर के पास जाने या उसे भगाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
फिलहाल घायल बाघिन का उपचार जबलपुर में जारी है। वन विभाग उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उचित इलाज और पोषण मिलने के बाद बाघिन जल्द स्वस्थ हो जाएगी और भविष्य में उसे फिर से उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ा जा सकेगा।