भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की कई वेबसाइटों पर साइबर हमले का खतरा मंडराने लगा है। वेबसाइट बनाने में इस्तेमाल होने वाली लोकप्रिय प्रोग्रामिंग भाषा पीएचपी (PHP) में गंभीर सुरक्षा खामियां सामने आने के बाद सरकारी विभागों और तकनीकी एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। इन खामियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधी वेबसाइटों के सर्वर तक अनधिकृत पहुंच बना सकते हैं और संवेदनशील जानकारी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के साइबर एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ग्रुप ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश सहित सभी राज्यों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।
अधिकारियों के अनुसार, सरकारी वेबसाइटों और ऑनलाइन सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया के कई देशों की साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने भी पीएचपी में मिली गंभीर खामियों को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि, मध्य प्रदेश की किसी सरकारी वेबसाइट पर सफल साइबर हमले या डेटा चोरी होने की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पीएचपी में मिलीं दो गंभीर सुरक्षा खामियां
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पीएचपी में दो महत्वपूर्ण कमजोरियां सामने आई हैं। इनकी पहचान CVE-2026-109618 और CVE-2026-109619 के रूप में की गई है।
इन खामियों को सामूहिक रूप से 'PHP2Shell' नाम दिया गया है। इनके जरिए हमलावर प्रभावित सर्वर पर दूर से दुर्भावनापूर्ण कोड चलाने का प्रयास कर सकते हैं।
भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल यानी सीईआरटी-इन ने 21 अक्टूबर को इन खामियों के संबंध में सुरक्षा चेतावनी जारी की थी।
एजेंसी ने बताया कि प्रभावित पीएचपी संस्करणों का उपयोग करने वाले सर्वर पर साइबर हमले का जोखिम अधिक है। सफल हमले की स्थिति में वेबसाइट और उससे जुड़े सिस्टम की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों को सतर्क रहने के निर्देश
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की एडवाइजरी के बाद मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों को अपनी वेबसाइटों और वेब एप्लिकेशन की सुरक्षा की समीक्षा करने की आवश्यकता है।
राज्य के कई विभाग नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराते हैं। इनमें प्रमाणपत्र, आवेदन, योजनाओं की जानकारी और अन्य डिजिटल सेवाएं शामिल हैं।
ऐसी सेवाओं के संचालन में वेब सर्वर, डेटाबेस और प्रोग्रामिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
यदि किसी वेबसाइट पर पीएचपी का प्रभावित संस्करण इस्तेमाल हो रहा है, तो उसकी सुरक्षा तुरंत मजबूत करना जरूरी है।
तकनीकी टीमों को संबंधित सॉफ्टवेयर की जांच करने, उपलब्ध सुरक्षा अपडेट लगाने और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करने की सलाह दी गई है।
क्या है PHP और क्यों होता है इसका इस्तेमाल?
पीएचपी एक ओपन-सोर्स, सर्वर-साइड प्रोग्रामिंग भाषा है। इसका इस्तेमाल डायनामिक वेबसाइट और वेब एप्लिकेशन बनाने के लिए किया जाता है।
जब कोई उपयोगकर्ता किसी वेबसाइट पर जानकारी भरता है या ऑनलाइन सेवा का उपयोग करता है, तो पीएचपी सर्वर पर उस अनुरोध को प्रोसेस करने में मदद कर सकती है।
इसके माध्यम से वेबसाइट डेटाबेस से जानकारी प्राप्त कर सकती है, आवेदन संबंधी विवरण संसाधित कर सकती है और उपयोगकर्ता के अनुरूप वेब पेज तैयार कर सकती है।
दुनियाभर में सरकारी संस्थान, निजी कंपनियां, शैक्षणिक संगठन और अन्य वेबसाइट संचालक इस तकनीक का उपयोग करते हैं।
यही कारण है कि पीएचपी में किसी गंभीर सुरक्षा खामी का असर बड़ी संख्या में वेबसाइटों और ऑनलाइन सेवाओं पर पड़ सकता है।
हैकर्स बिना पासवर्ड के भी बना सकते हैं पहुंच
सीईआरटी-इन के अनुसार, नई कमजोरियों का दुरुपयोग करने के लिए हमलावर को प्रभावित वेबसाइट पर पहले से अधिकृत पहुंच होना जरूरी नहीं है।
विशेष रूप से तैयार किए गए अनुरोध के माध्यम से हमलावर प्रभावित सर्वर पर अनधिकृत कोड चलाने का प्रयास कर सकते हैं।
यदि हमला सफल होता है, तो साइबर अपराधी वेबसाइट की कार्यप्रणाली बाधित कर सकते हैं या सर्वर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने का प्रयास कर सकते हैं।
कुछ परिस्थितियों में हमलावर वेबसाइट की सामग्री बदल सकते हैं और सिस्टम की अन्य सेवाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, सुरक्षा खामी मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित वेबसाइट निश्चित रूप से हैक हो चुकी है। इसके लिए जांच और तकनीकी साक्ष्यों की आवश्यकता होती है।
अमेरिका और यूरोप में भी जारी हुई चेतावनी
पीएचपी की इन सुरक्षा खामियों को लेकर दुनिया के कई देशों ने गंभीर चिंता जताई है।
अमेरिका की साइबर सुरक्षा और अवसंरचना सुरक्षा एजेंसी (सीआईएसए) ने 21 अक्टूबर को संगठनों से प्रभावित पीएचपी संस्करणों को तुरंत अपडेट करने की अपील की थी।
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने भी चेतावनी दी कि कमजोरियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधी प्रभावित सर्वर को नियंत्रित कर सकते हैं।
यूरोपीय संघ की साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने भी इसी तरह की एडवाइजरी जारी की है।
नीदरलैंड की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ने एहतियात के तौर पर अपनी वेबसाइट अस्थायी रूप से बंद कर दी थी। अन्य कई संस्थानों ने भी सुरक्षा जांच के दौरान वेबसाइटों को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया।
सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए अपडेट जारी
पीएचपी के डेवलपर्स ने इन कमजोरियों को दूर करने के लिए 21 अक्टूबर को सुरक्षा अपडेट जारी किए।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित सिस्टम में नए संस्करण स्थापित करने की सलाह दी है।
प्रमुख सुरक्षित अपडेट में पीएचपी 8.5.12, 8.4.27, 8.3.36 और 8.2.35 शामिल हैं।
सीआईएसए के अनुसार, संगठनों को सबसे पहले इंटरनेट से जुड़े उन सर्वरों की पहचान करनी चाहिए, जिन पर पीएचपी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसके बाद संबंधित सिस्टम पर सुरक्षा पैच लगाने और संदिग्ध गतिविधियों का परीक्षण करने की आवश्यकता है।
जिन सर्वरों को तत्काल अपडेट नहीं किया जा सकता, उन्हें जोखिम कम होने तक अस्थायी रूप से ऑफलाइन रखने की सलाह भी दी गई है।
सरकारी डेटा की सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
सरकारी वेबसाइटों पर नागरिकों से संबंधित विभिन्न प्रकार की जानकारी उपलब्ध होती है। ऐसे में सुरक्षा कमजोरियों को समय पर दूर करना महत्वपूर्ण है।
यदि किसी सरकारी पोर्टल पर साइबर हमला सफल हो जाता है, तो संबंधित ऑनलाइन सेवाएं बाधित हो सकती हैं।
इसके अलावा प्रभावित सिस्टम में उपलब्ध डेटा की गोपनीयता और विश्वसनीयता पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि, प्रत्येक वेबसाइट की सुरक्षा व्यवस्था अलग होती है और वास्तविक जोखिम उपयोग किए जा रहे सॉफ्टवेयर, सर्वर की संरचना तथा सुरक्षा उपायों पर निर्भर करता है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, केवल अपडेट लगाने के बजाय सर्वर लॉग की जांच और नियमित सुरक्षा परीक्षण करना भी जरूरी है।
साइबर हमले रोकने के लिए बढ़ाई जाएगी निगरानी
केंद्र सरकार की सुरक्षा चेतावनी के बाद सरकारी वेबसाइटों के तकनीकी प्रबंधन में सतर्कता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित सिस्टम की पहचान, पैचिंग, नेटवर्क निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की जांच को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।
सीईआरटी-इन ने भी गंभीर कमजोरियों के मद्देनजर संबंधित संगठनों को तत्काल सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा है।
फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार की किसी विशिष्ट वेबसाइट के हैक होने या नागरिकों का डेटा चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन वैश्विक स्तर पर सामने आई इन कमजोरियों ने सरकारी डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा को लेकर सावधानी बढ़ा दी है।
आने वाले दिनों में संबंधित तकनीकी एजेंसियों द्वारा किए जाने वाले सुरक्षा परीक्षणों से स्पष्ट हो सकेगा कि राज्य की किन वेबसाइटों को अपडेट करने की जरूरत थी और सुरक्षा उपाय कितने प्रभावी रहे।