मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में गंभीर रूप से घायल मिले 19 महीने के चीता शावक की मौत की खबर सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, शावक के पेट में कई छर्रे मिलने के बाद उसे गोली मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। यह शावक कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता निर्वा की संतान था। रविवार, 25 अक्टूबर को मुरैना वन क्षेत्र में घायल हालत में मिलने के बाद उसे उपचार के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया गया था। वन विभाग और वन्यजीव अपराध जांच एजेंसियां घटना की जांच में जुटी हैं। यदि गोली मारने की पुष्टि होती है, तो सितंबर 2022 में भारत में चीतों की पुनर्स्थापना शुरू होने के बाद गोलीबारी से चीते की मौत का यह पहला ज्ञात मामला होगा। घटना ने देश की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्स्थापना परियोजना और खुले जंगलों में घूम रहे चीतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुरैना के जंगल में घायल मिला था 19 महीने का शावक
वन विभाग के अनुसार, मादा चीता निर्वा का 19 महीने का नर शावक मुरैना जिले के वन क्षेत्र में विचरण कर रहा था। रविवार शाम निगरानी दल ने उसे गंभीर रूप से घायल अवस्था में देखा।बताया गया कि शावक सामान्य तरीके से चल-फिर नहीं पा रहा था। उसकी पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान दिखाई दिए थे।घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की बचाव टीम सक्रिय हुई। रविवार रात शावक को सुरक्षित पकड़कर उपचार के लिए श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क के चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया।प्रारंभिक जांच के दौरान अधिकारियों ने चोटों के कारणों को लेकर कई संभावनाओं पर विचार किया था। इनमें किसी अन्य जंगली जानवर के हमले और मानव गतिविधियों से चोट लगने की आशंका शामिल थी।
पेट में मिले छर्रे, गोली मारने की आशंका
मंगलवार को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घायल चीता शावक के पेट में कई छर्रे पाए गए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि किसी व्यक्ति ने उस पर गोली चलाई थी।वन विभाग से जुड़े सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया है कि गोली संभवतः नजदीक से चलाई गई थी।हालांकि, गोली चलाने वाले व्यक्ति की पहचान, घटना का उद्देश्य और इस्तेमाल किए गए हथियार के संबंध में जांच जारी है।जांच अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शावक को किसने निशाना बनाया और हमला किस परिस्थिति में हुआ।छर्रे मिलने की रिपोर्ट ने घटना को संभावित वन्यजीव अपराध का मामला बना दिया है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स को सौंपी गई जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश वन विभाग ने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) की टीम को जांच के लिए भेजा है।यह विशेष इकाई वन्यजीवों के अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों से संबंधित मामलों की जांच करती है।टीम घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि शावक पर हमला हुआ था या वह किसी अन्य परिस्थिति में घायल हुआ।अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में दूसरे जंगली जानवर से संघर्ष, लाठी या अन्य हथियार से हमला और गोली लगने की संभावनाओं को ध्यान में रखा गया था।अब छर्रे मिलने की जानकारी के बाद गोलीबारी की आशंका प्रमुख हो गई है।
भरमार बंदूक से गोली चलने की आशंका
जांच से जुड़ी रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि चीते को स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाली भरमार बंदूक से निशाना बनाया गया हो सकता है।भरमार एक पारंपरिक प्रकार की बंदूक है, जिसमें आगे से बारूद और छर्रे भरे जाते हैं। हालांकि, घटना में इसी हथियार के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।वन्यजीव अपराध जांच एजेंसियों के सामने हथियार की पहचान के साथ यह पता लगाने की चुनौती भी है कि घटना जानबूझकर किए गए शिकार से जुड़ी थी या किसी अन्य कारण से गोली चलाई गई थी।
कूनो नेशनल पार्क से बाहर कैसे पहुंचा शावक?
कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए कई चीते खुले जंगलों में विचरण कर रहे हैं। ये जानवर अपने लिए नए क्षेत्र तलाशते हुए राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं से बाहर भी निकल जाते हैं।मादा चीता निर्वा का शावक भी इसी तरह मुरैना के पहाड़गढ़ क्षेत्र तक पहुंच गया था।कूनो के बाहर का इलाका कई स्थानों पर गांवों, खेतों और अन्य वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में चीतों का सामना स्थानीय ग्रामीणों, पशुधन और दूसरे वन्यजीवों से हो सकता है।इस घटना ने सवाल खड़ा किया है कि राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से बाहर जाने वाले चीतों की निगरानी और सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
मुरैना में पहले भी सामने आ चुके हैं अवैध शिकार के मामले
मुरैना जिले में वन्यजीवों के अवैध शिकार की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।अगस्त 2026 में जिले में तेंदुओं के कथित अवैध शिकार से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा होने की खबर आई थी। जांच में दस से अधिक तेंदुओं को फंसाकर मारने के आरोप सामने आए थे।हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उस मामले और चीता शावक के घायल मिलने की घटना के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।इसके बावजूद ऐसी घटनाएं जंगलों में वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और सुरक्षा निगरानी की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
भारत में 2022 में शुरू हुई थी चीता परियोजना
भारत में लगभग सात दशक पहले चीते विलुप्त घोषित कर दिए गए थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने चीतों को दोबारा बसाने के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की।17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे।इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए। परियोजना के अंतर्गत आगे भी अफ्रीकी देशों से चीतों को भारत लाने और उनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं।इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में चीतों की स्थायी आबादी विकसित करना और घास के मैदानों तथा संबंधित पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
भारत में जन्मे शावकों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
चीता परियोजना के तहत भारत में जन्मे शावकों की संख्या बढ़ना संरक्षण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है।लेकिन जैसे-जैसे चीते खुले जंगलों में फैल रहे हैं, उनकी निगरानी और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, युवा चीते नए क्षेत्र तलाशते समय अपरिचित वातावरण, अन्य शिकारी जानवरों और मानव बस्तियों के संपर्क में आ सकते हैं।ऐसे में केवल रेडियो कॉलर से उनकी गतिविधियों की निगरानी करना पर्याप्त नहीं है। संभावित संघर्ष वाले क्षेत्रों की पहचान, स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय और वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण है।
चीता परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मुरैना में चीता शावक की मौत की खबर ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है।यदि जांच में यह साबित होता है कि शावक को जानबूझकर गोली मारी गई थी, तो यह चीता परियोजना के सामने एक गंभीर वन्यजीव अपराध का मामला होगा।इस घटना के बाद वन विभाग के लिए राष्ट्रीय उद्यान से बाहर घूम रहे चीतों की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के उपायों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण होगा।