इंदौर से अहमदाबाद पहुंचा जीवनदायी दिल

Update: 2026-07-27 10:39 GMT

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर से गुजरात के अहमदाबाद तक सोमवार को 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस विशेष कॉरिडोर का उद्देश्य 25 वर्षीय युवक के दिल को अहमदाबाद पहुंचाना था, ताकि एक जरूरतमंद मरीज को नया जीवन मिल सके। अंगदान की इस मानवीय पहल के तहत इंदौर से अहमदाबाद तक तेज और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था तैयार की गई।

जानकारी के अनुसार, इंदौर के खजूरी बाजार निवासी 25 वर्षीय गौरव दवे को अचानक ब्रेन हैमरेज होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गौरव, सतीश दवे और कविता दवे के बेटे थे। 13 जुलाई को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें राजश्री अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।

चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत डॉक्टरों की टीम ने गौरव की स्थिति की दो बार जांच की। सभी आवश्यक मेडिकल मानकों को पूरा करने के बाद रविवार रात उन्हें ब्रेन-डेड घोषित किया गया। इसके बाद परिजनों ने मानवता का परिचय देते हुए उनके अंगदान का निर्णय लिया, जिससे कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सके।

अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गौरव का हृदय अहमदाबाद भेजने की तैयारी शुरू की गई। समय पर अंग को प्रत्यारोपण केंद्र तक पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि हृदय जैसे अंगों को सीमित समय के भीतर सुरक्षित तरीके से ट्रांसप्लांट किया जाना आवश्यक होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंदौर से अहमदाबाद के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

ग्रीन कॉरिडोर के दौरान सड़क मार्ग को सुचारू रखा जाता है, ताकि एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के अपने गंतव्य तक पहुंच सके। पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से पूरे मार्ग की व्यवस्था की जाती है। इस बार भी संबंधित विभागों ने आपसी तालमेल के साथ एंबुलेंस की सुरक्षित और तेज आवाजाही सुनिश्चित की।

बताया गया कि गौरव के हृदय से अहमदाबाद के 28 वर्षीय मरीज को जीवनदान मिलने की उम्मीद है। यह अंगदान न केवल एक मरीज के लिए नई उम्मीद लेकर आया, बल्कि समाज में अंगदान के महत्व को भी उजागर करता है।

अंगदान विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन-डेड मरीजों के अंग कई गंभीर रोगियों के लिए जीवन बचाने का माध्यम बन सकते हैं। हालांकि, इसके लिए परिवार की सहमति और निर्धारित चिकित्सा प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। गौरव के परिवार के फैसले ने कई लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करने का काम किया है।

इंदौर में इससे पहले भी कई बार ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों को दूसरे शहरों तक पहुंचाया गया है। हर बार पुलिस, प्रशासन और चिकित्सा संस्थानों के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो पाया है। 68वें ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण भी इसी श्रृंखला का हिस्सा है।

अहमदाबाद तक हृदय पहुंचाने के लिए समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती थी। एंबुलेंस के रास्ते में किसी तरह की देरी न हो, इसके लिए पहले से यातायात व्यवस्था तैयार की गई। पुलिसकर्मियों ने मार्ग पर तैनाती कर ट्रैफिक को नियंत्रित किया, जिससे एंबुलेंस तेजी से आगे बढ़ सकी।

गौरव दवे के परिवार का यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणा माना जा रहा है। अपने प्रियजन को खोने के दुख के बीच अंगदान का फैसला लेकर परिवार ने कई लोगों के जीवन में उम्मीद जगाई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर उपचार मिल सकता है। भारत में अंगों की जरूरत और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है, ऐसे में अधिक से अधिक लोगों का अंगदान के लिए आगे आना महत्वपूर्ण है।

इंदौर से अहमदाबाद तक बना यह ग्रीन कॉरिडोर केवल एक चिकित्सा व्यवस्था नहीं, बल्कि मानवता और सहयोग का उदाहरण भी बना। गौरव दवे के अंगों के माध्यम से कई लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है और उनका परिवार समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ गया है।

Tags:    

Similar News