Monsoon कमजोर पड़ने से एमपी परेशान, 16% कम बारिश दर्ज; अब जुलाई के अंत से उम्मीद
Bhopal भोपाल : मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। पिछले कई दिनों से प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में तेज बारिश नहीं होने के कारण अब वर्षा का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां बारिश की कमी 23 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में अगले चार दिनों तक हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। हालांकि, जुलाई के आखिरी सप्ताह में एक मजबूत मौसम तंत्र सक्रिय होने के संकेत हैं, जिसके बाद प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है।
39 जिलों में सामान्य से कम बारिश
मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश के 39 जिले ऐसे हैं, जहां अब तक सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इन जिलों में अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया सहित कई जिले शामिल हैं।
इसके अलावा पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा में भी बारिश की कमी बनी हुई है।
मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिले इस समय बारिश की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में खेती और जल स्रोतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, जुलाई के अंतिम सप्ताह में बनने वाले मजबूत सिस्टम से बारिश की स्थिति में सुधार आने की संभावना है।
12 दिनों से नहीं हुई तेज बारिश
भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश में अब तक कुल 261.4 मिलीमीटर यानी करीब 10.3 इंच बारिश दर्ज की गई है। जबकि इस अवधि तक सामान्य रूप से 311.8 मिलीमीटर यानी करीब 12.3 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी। लगातार 12 दिनों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और तेज बारिश नहीं होने के कारण बारिश का अंतर बढ़ता जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी वर्षा सामान्य से करीब 10 प्रतिशत पीछे चल रही है। यही वजह है कि प्रदेश के कई जिले अभी भी कम बारिश वाले क्षेत्रों की श्रेणी में बने हुए हैं।
जुलाई के अंतिम सप्ताह में राहत की उम्मीद
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है। वर्तमान में बारिश की गतिविधियां कमजोर जरूर हुई हैं, लेकिन जुलाई के आखिरी सप्ताह में मौसम का नया सिस्टम बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश हो सकती है।
किसानों की नजर भी अब आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हुई है। खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी है। अगर जुलाई के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश होती है तो बारिश की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है। वहीं, प्रशासन भी मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।