MP : प्राइवेट स्कूल बसों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने के निर्देश

Update: 2026-07-12 05:19 GMT

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : प्राइवेट स्कूल बसों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शनिवार को ट्रैफिक पुलिस कार्यालय परिसर में स्कूल संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों ने निजी स्कूल मालिकों को निर्देश दिए कि वे अपनी बसों का संचालन पूरी तरह से ट्रैफिक नियमों के अनुसार करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि स्कूल बस चालक नियमों का उल्लंघन करते पाए गए तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक का मुख्य उद्देश्य स्कूल बसों से जुड़े सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना और बच्चों की यात्रा को सुरक्षित बनाना था। अधिकारियों ने स्कूल संचालकों से कहा कि बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्कूल बस चालकों पर रहेगी विशेष नजर

बैठक में अधिकारियों ने कहा कि स्कूल बस चालक यातायात नियमों का पालन करें, जिसमें निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाना, सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना और बसों की नियमित जांच शामिल है।

अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि केवल प्रशिक्षित और वैध लाइसेंस रखने वाले चालक ही बस चलाएं। इसके अलावा बसों में आवश्यक सुरक्षा उपकरण, प्राथमिक उपचार किट, अग्निशमन यंत्र और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कई बार बस चालकों की लापरवाही से दुर्घटनाओं की स्थिति बनती है, इसलिए स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी है कि वे चालकों के व्यवहार और ड्राइविंग शैली पर नजर रखें।

बैठक में कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

बैठक की अध्यक्षता ट्रैफिक इंस्पेक्टर सुभाष उइके, जिला शिक्षा अधिकारी सुमन परस्ते और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के अधिकारी पंकज डेहरिया ने संयुक्त रूप से की।

इस दौरान अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को यातायात नियमों और स्कूल बस संचालन से जुड़े दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्कूल बसों का संचालन निर्धारित नियमों के अनुसार होना चाहिए ताकि बच्चों, अभिभावकों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बसों की फिटनेस और दस्तावेजों की जांच जरूरी

अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को निर्देश दिए कि वे अपनी बसों के सभी जरूरी दस्तावेज अपडेट रखें। इनमें वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि समय-समय पर बसों की तकनीकी जांच भी कराई जानी चाहिए, ताकि किसी खराबी के कारण दुर्घटना की संभावना न बने।

स्कूल बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने, तेज गति से वाहन चलाने और नियमों की अनदेखी करने जैसी शिकायतों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

चालकों को प्रशिक्षण देने पर जोर

बैठक में स्कूल बस चालकों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि चालकों को सड़क सुरक्षा नियमों, बच्चों के साथ व्यवहार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की जानकारी होना जरूरी है।

उन्होंने स्कूल प्रबंधन से कहा कि समय-समय पर चालकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकें।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अधिकारियों ने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। स्कूल बसों में यात्रा करने वाले बच्चों की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन और बस संचालकों की होती है।

उन्होंने कहा कि अभिभावक भी यह सुनिश्चित करें कि उनके बच्चे सुरक्षित और नियमों के अनुसार संचालित वाहनों से ही स्कूल जाएं।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल बस चालकों और संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान बसों में कोई कमी पाई जाती है या चालक नियमों का पालन नहीं करते हैं तो संबंधित लोगों पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने स्कूल संचालकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य कार्रवाई करना नहीं बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था तैयार करना है।

स्कूल संचालकों से सहयोग की अपील

बैठक के अंत में अधिकारियों ने सभी निजी स्कूल संचालकों से अपील की कि वे प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और बस संचालन में पूरी पारदर्शिता बरतें।

उन्होंने कहा कि सुरक्षित स्कूल परिवहन व्यवस्था के लिए प्रशासन, स्कूल प्रबंधन, चालक और अभिभावकों सभी की जिम्मेदारी है। अगर सभी पक्ष मिलकर काम करेंगे तो सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है और बच्चों की यात्रा को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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