भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन के भीतर बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सामने आई है। दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर 2026 को आयोजित 'वोट चोरी' रैली में शामिल नहीं होने पर भारतीय युवा कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के 60 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से प्रदेश के राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। निलंबित पदाधिकारियों में नौ जिलाध्यक्ष, पांच प्रदेश उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई को संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कांग्रेस और विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली आयोजित की गई थी। इस रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया था। रैली का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाना था। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की थी।
इस कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस संगठन ने अपने पदाधिकारियों को दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए थे। हालांकि, मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के कई पदाधिकारी रैली में शामिल नहीं हुए। राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया। मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस की ओर से जारी आदेश के अनुसार, दिल्ली की रैली में अनुपस्थित रहने को संगठनात्मक अनुशासनहीनता माना गया है। इसके चलते सभी 60 पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक निलंबित कर दिया गया है।
इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि निलंबित होने वालों में संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल हैं। नौ जिलाध्यक्षों के अलावा प्रदेश स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव भी कार्रवाई की जद में आए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि युवा कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व संगठन के भीतर अनुशासन और सक्रियता को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। दिल्ली में आयोजित महारैली को कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम माना जा रहा था। इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया था। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनसमर्थन दिखाना था।
राजनीतिक दृष्टि से यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे समय में इतनी बड़ी संख्या में पदाधिकारियों को निलंबित किए जाने से संगठन के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, इस कार्रवाई को केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रखा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय युवा कांग्रेस ने दिल्ली की रैली में अनुपस्थित रहने वाले गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, झारखंड और हिमाचल प्रदेश के पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की है। कुल मिलाकर सात राज्यों और उत्तर प्रदेश मध्य इकाई के 215 पदाधिकारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस नेतृत्व की इस सख्ती के बाद संगठन के भीतर यह संदेश गया है कि बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों में पदाधिकारियों की भागीदारी को गंभीरता से लिया जाएगा। हालांकि, कुछ निलंबित नेताओं की अनुपस्थिति के पीछे व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण होने की बात भी सामने आई है। फिलहाल मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के 60 पदाधिकारियों का निलंबन अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठन इन पदाधिकारियों की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण पर क्या रुख अपनाता है और निलंबन वापस लेने को लेकर कोई निर्णय होता है या नहीं।
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