उमंग सिंघार ने सुनी किसानों की पीड़ा, केन-बेतवा परियोजना का किया विरोध

Update: 2026-07-15 08:15 GMT

छतरपुर : मध्य प्रदेश में बहुचर्चित केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर विरोध का स्वर लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बुधवार को छतरपुर जिले के बिजावर पहुंचे, जहां उन्होंने परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर प्रभावित लोगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार को विकास परियोजनाओं के साथ-साथ लोगों के अधिकारों और आजीविका की भी रक्षा करनी चाहिए।

बिजावर क्षेत्र में पिछले कुछ समय से केन-बेतवा परियोजना के विरोध में किसान और आदिवासी समुदाय आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि परियोजना के कारण कई गांवों के विस्थापन, कृषि भूमि के नुकसान और आजीविका पर संकट का खतरा मंडरा रहा है। प्रदर्शनकारी लंबे समय से सरकार से अपनी मांगों पर विचार करने और उचित समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।

उमंग सिंघार ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे लोग किसी समस्या के कारण नहीं, बल्कि सरकार की कथित असंवेदनशील नीतियों और उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रभावित लोगों की बात समय रहते सुनी जाती और उनकी चिंताओं का समाधान किया जाता, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाना पड़ता।

दौरे के दौरान एक भावनात्मक दृश्य भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों से मिलने के लिए उमंग सिंघार नदी में उतरे और घुटनों तक पानी में खड़े होकर लोगों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने एक बुजुर्ग महिला की व्यथा सुनी, जो प्रतीकात्मक रूप से बनाई गई चिता पर लेटी हुई थी। महिला ने परियोजना से होने वाले संभावित विस्थापन और अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की। सिंघार ने पूरे धैर्य के साथ उनकी बातें सुनीं और भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य लोगों का जीवन बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि उन्हें अपने घर, जमीन और आजीविका से वंचित करना। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों की वास्तविक समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है।

उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के चेहरे पर दिखाई दे रहा गुस्सा और निराशा इस बात का संकेत है कि उनकी मांगों पर अब तक उचित कार्रवाई नहीं हुई है। सरकार को संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए और प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा, पुनर्वास तथा आजीविका की गारंटी सुनिश्चित करनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने भी नेता प्रतिपक्ष के सामने अपनी समस्याएं रखीं। उनका कहना था कि परियोजना से कई गांव प्रभावित होंगे, जिससे खेती, पशुपालन और पारंपरिक जीवनशैली पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की स्पष्ट व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक परियोजना से जुड़े कार्यों को आगे न बढ़ाया जाए।

उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस प्रभावित किसानों और आदिवासी समुदाय के साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधानसभा से लेकर अन्य लोकतांत्रिक मंचों तक इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।

केन-बेतवा परियोजना देश की महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। हालांकि, परियोजना के दायरे में आने वाले कई गांवों के विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से विरोध जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़ी परियोजनाओं में विकास और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। प्रभावित लोगों को समय पर जानकारी, पर्याप्त मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराना किसी भी परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

फिलहाल बिजावर क्षेत्र में किसानों और आदिवासी परिवारों का विरोध जारी है। सरकार की ओर से अब तक इस ताजा प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष के दौरे के बाद इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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