भोपाल : 29 अक्टूबर 2026। चार राज्यों में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने चुनाव नतीजों को भाजपा के प्रति बढ़ते समर्थन का संकेत बताते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में भाजपा का दबदबा कायम हो गया है। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों ने कांग्रेस के उन आरोपों का जवाब दे दिया है, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा के दावों पर पलटवार करते हुए कहा कि चुनाव परिणामों को केवल एक पार्टी की जीत के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इन चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा अकेले 13 सीटें जीतने में सफल रही। समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत हासिल की और कांग्रेस को एक सीट मिली। चुनाव परिणामों के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
बैलेट पेपर से चुनाव में भी भाजपा की जीत: विश्वास सारंग
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने गुरुवार को भोपाल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से ईवीएम पर सवाल उठाती रही है और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती है। लेकिन विधान परिषद चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल के बावजूद भाजपा ने बड़ी संख्या में सीटें जीती हैं।सारंग ने कहा कि इन परिणामों ने कांग्रेस के दावों की सच्चाई सामने ला दी है। उनका कहना था कि विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा करने का प्रयास करता रहा है, जबकि मतदाता अपने फैसले से स्पष्ट संदेश दे रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को सफलता मिली है। विशेष रूप से कर्नाटक के परिणामों का उल्लेख करते हुए सारंग ने कहा कि यह भाजपा की राजनीतिक स्वीकार्यता का उदाहरण है।मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा की नीतियों को जनता का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं से चुनावी परिणामों को स्वीकार करने और अनावश्यक राजनीतिक आरोप लगाने से बचने की अपील की।
कांग्रेस ने भाजपा के दावों पर किया पलटवार
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भाजपा द्वारा चुनाव परिणामों को अपनी व्यापक राजनीतिक सफलता के प्रमाण के रूप में पेश करने पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा को उन सीटों के परिणामों पर भी ध्यान देना चाहिए, जहां विपक्षी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र की नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा को नागपुर में मिली हार पर भी जवाब देना चाहिए।नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय वाले शहर में कांग्रेस की जीत को पार्टी नेताओं ने महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि बताया है।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि दूसरों को सलाह देने के बजाय भाजपा नेतृत्व को अपने चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव परिणामों में भाजपा की जीत के साथ विपक्ष की सफलताओं को भी स्वीकार किया जाना चाहिए।
कर्नाटक में कांग्रेस को झटका, भाजपा-जेडीएस गठबंधन की जीत
विधान परिषद चुनावों में कर्नाटक के परिणाम विशेष चर्चा का विषय बने हुए हैं। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद भाजपा और जनता दल सेक्युलर गठबंधन ने चारों सीटों पर जीत हासिल की।भाजपा ने तीन सीटें बरकरार रखीं, जबकि जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट कांग्रेस से छीन ली। इन परिणामों के बाद भाजपा ने कांग्रेस सरकार की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं।हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया विधानसभा या लोकसभा चुनावों से अलग होती है। इन सीटों पर निर्धारित पात्रता वाले मतदाता मतदान करते हैं। ऐसे में इनके परिणामों को पूरे राज्य के सभी मतदाताओं की राय का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनावों के दौरान भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। कुल 11 सीटों में भाजपा ने छह पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी पांच सीटें जीतने में सफल रही।समाजवादी पार्टी ने वाराणसी और कुछ अन्य महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज करके भाजपा को चुनौती दी। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए यहां के चुनाव परिणामों को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई।कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इन चुनावों को लेकर कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों को व्यापक जनादेश के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने भाजपा के देशव्यापी समर्थन के दावे पर भी सवाल उठाए।
बिहार में भी कांग्रेस को मिली निराशा
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। पार्टी कई निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभावशाली मुकाबला नहीं कर सकी। वहीं, एनडीए को चार सीटों पर सफलता मिली।इस चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी अपनी पहली विधान परिषद सीट जीतकर राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई। बिहार के नतीजों ने भाजपा और उसके सहयोगियों को संतोष का अवसर दिया, जबकि कांग्रेस के सामने अपने संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा की चुनौती खड़ी हुई है।
ईवीएम और बैलेट पेपर को लेकर फिर छिड़ी बहस
विधान परिषद चुनाव परिणामों के बाद ईवीएम और बैलेट पेपर को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों में भी विपक्ष को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे ईवीएम को लेकर किए जाने वाले आरोप कमजोर पड़ते हैं।वहीं, कांग्रेस का कहना है कि किसी एक चुनाव के परिणाम से चुनाव प्रणाली को लेकर उठने वाले सभी प्रश्नों का समाधान नहीं हो जाता। पार्टी लगातार चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के विश्वास से संबंधित मुद्दे उठाती रही है।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से इन चुनावों ने कई अलग-अलग संकेत दिए हैं। भाजपा ने सबसे अधिक सीटें जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दिखाई है, जबकि समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश और कांग्रेस ने नागपुर में महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है।फिलहाल एमएलसी चुनावों के नतीजों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। विश्वास सारंग के बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि इन चुनावों को राष्ट्रीय राजनीति के व्यापक जनमत का संकेत माना जाए या सीमित मतदाता वर्ग वाले विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्रों के परिणामों के रूप में देखा जाए।