Maharashtra: महाराष्ट्र में स्कूली बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ा फैसला लिया है। विभाग के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने घोषणा की है कि अब बिना खाद्य लाइसेंस के किसी भी स्कूल, छात्रावास या आंगनवाड़ी में भोजन की आपूर्ति नहीं की जा सकेगी। यह नियम सरकारी, अर्धसरकारी, अनुदानित और गैर-अनुदानित सभी स्कूलों पर लागू होगा।
मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तुकाराम मुंढे ने बताया कि राज्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में करीब 2 करोड़ स्कूली छात्र हैं और उन्हें सुरक्षित, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि स्कूल पोषण आहार से जुड़े नियम वर्ष 2020 में बनाए गए थे और 2021 से लागू हैं। अब इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।
मुंढे ने कहा कि स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कई स्तरों पर भ्रम की स्थिति थी कि किस विभाग की क्या जिम्मेदारी होगी। इसे दूर करने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत स्कूलों, छात्रावासों, कैंटीनों और आंगनवाड़ियों में भोजन उपलब्ध कराने वाले सभी संस्थानों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए खाद्य लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना वैध खाद्य लाइसेंस के कोई भी व्यक्ति या संस्था स्कूलों, छात्रावासों या आंगनवाड़ियों में भोजन की आपूर्ति नहीं कर सकेगी। यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बच्चों तक सुरक्षित और पौष्टिक भोजन पहुंचाना है। इसके लिए राज्यभर में निरीक्षण अभियान और खाद्य सुरक्षा जांच लगातार जारी रहेगी। सरकार चाहती है कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता न हो और सभी शैक्षणिक संस्थान निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें।