मुंबई : महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के चेयरमैन, मुंबई बैंक के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक प्रवीण दरेकर को नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (NCUI) का निदेशक (डायरेक्टर) निर्विरोध निर्वाचित किया गया है। उनके निर्विरोध निर्वाचन के बाद महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र, विभिन्न सहकारी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और समर्थकों ने उन्हें बधाई दी है। इसे सहकारिता क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका और लंबे अनुभव की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
प्रवीण दरेकर पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में वे महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव यूनियन के चेयरमैन होने के साथ-साथ मुंबई बैंक के अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा वे महाराष्ट्र हाउसिंग सेल्फ/ग्रुप रीडेवलपमेंट अथॉरिटी से भी जुड़े हुए हैं। सहकारिता से संबंधित विभिन्न संस्थाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें इस क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है।
नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया देश की शीर्ष सहकारी संस्था मानी जाती है, जिसका उद्देश्य सहकारी आंदोलन को मजबूत करना, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना और सहकारिता के विकास के लिए नीतिगत सहयोग प्रदान करना है। ऐसे में इस संस्था के निदेशक के रूप में प्रवीण दरेकर का निर्विरोध चुना जाना उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी माना जा रहा है।
निर्विरोध निर्वाचन के बाद सहकारिता क्षेत्र से जुड़े कई संगठनों और पदाधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। समर्थकों का कहना है कि दरेकर ने वर्षों से सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने और आम लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार कार्य किया है। इसी अनुभव को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रवीण दरेकर ने अपने सार्वजनिक जीवन में सहकारिता क्षेत्र के विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने विभिन्न सहकारी योजनाओं के माध्यम से आम नागरिकों, किसानों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को लाभ पहुंचाने के प्रयास किए हैं। उनका मानना रहा है कि सहकारिता मॉडल आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक सशक्तीकरण का भी प्रभावी माध्यम बन सकता है।
मुंबई बैंक के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में कई पहल की हैं। उनके कार्यकाल के दौरान महिलाओं के लिए शून्य ब्याज (जीरो इंटरेस्ट) पर व्यावसायिक ऋण जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया गया, जिससे महिला उद्यमियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल सके। इसके अलावा बैंक के माध्यम से विभिन्न वर्गों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
आवास क्षेत्र में भी प्रवीण दरेकर ने स्वयं पुनर्विकास (सेल्फ रीडेवलपमेंट) योजनाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य किया है। उनका प्रयास रहा है कि पुराने भवनों में रहने वाले लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवास उपलब्ध हो सके। इस दिशा में उन्होंने सहकारी हाउसिंग सोसायटियों को आत्मनिर्भर बनाकर पुनर्विकास की प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया है।
विधानसभा में भी दरेकर समय-समय पर सहकारिता क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। उन्होंने सहकारी संस्थाओं की चुनौतियों, वित्तीय सुधारों, किसानों और आम नागरिकों से जुड़े विषयों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना रहा है कि सहकारी संस्थाओं को मजबूत किए बिना ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को व्यापक रूप से सशक्त नहीं बनाया जा सकता।
राजनीतिक और सहकारिता क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर यह नई जिम्मेदारी मिलने से प्रवीण दरेकर को देशभर की सहकारी संस्थाओं के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। इससे महाराष्ट्र के अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने और अन्य राज्यों की सफल सहकारी व्यवस्थाओं से सीखने का भी अवसर मिलेगा।
दरेकर के समर्थकों का कहना है कि उनका निर्विरोध निर्वाचन इस बात का संकेत है कि सहकारिता क्षेत्र में उनके अनुभव और नेतृत्व को व्यापक स्वीकार्यता मिली है। उनका विश्वास है कि नई जिम्मेदारी के साथ वे देश में सहकारी आंदोलन को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभाएंगे।
निर्वाचन के बाद प्रवीण दरेकर ने सभी सदस्यों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे उन्हें मिली इस जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर रोजगार, वित्तीय समावेशन और सामाजिक विकास को नई गति देने की दिशा में कार्य जारी रहेगा।
प्रवीण दरेकर के नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया के निदेशक बनने को महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से राष्ट्रीय स्तर पर सहकारी आंदोलन को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।